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गुरुवार, 05 अप्रैल, 2007 को 12:12 GMT तक के समाचार

मुसलमानों और ईसाइयों के लिए आरक्षण

तमिलनाडु सरकार ने मुसलमानों और ईसाइयों के लिए सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में विशेष आरक्षण की घोषणा की है.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री करुणानिधि ने गुरूवार को राज्य विधानसभा में कहा कि उनकी सरकार ने आरक्षण के मामले में राज्य के पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफ़ारिशों को स्वीकार कर लिया है.

इस आयोग के अध्यक्ष मद्रास हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायधीश न्यायमूर्ति एम जनार्दनम हैं.

राज्य में मुसलमानों और ईसाइयों के लिए आरक्षण देने का यह फ़ैसला ऐसे समय में आया है जब अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण को चुनौती देने वाली एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में पहले से दायर है और जिस पर फ़ैसले का इंतज़ार किया जा रहा है.

तमिलनाडु एक ऐसा राज्य है जहाँ विभिन्न वर्गों के लोगों को सबसे ज़्यादा यानी क़रीब 69 प्रतिशत तक आरक्षण की व्यवस्था है.

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी आधार पर आरक्षण की सीमा पचास प्रतिशत निर्धारित कर दी थी.

इस सीमा से बचने के लिए तमिलनाडु सरकार ने एक विशेष क़ानून के तहत आरक्षण को नौंवी अनुसूची में डाल दिया था.

लेकिन जनवरी 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया था कि संविधान की नौवीं अनुसूची के तहत बनाए गए क़ानून भी न्यायिक समीक्षा के दायरे में आते हैं. सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु में 69 प्रतिशत तक आरक्षण कोटा मुहैया कराने की वैधता के बारे में भी फ़ैसला करेगा.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार करुणानिधि ने कहा कि राज्य सरकार आरक्षण की सीमा 69 प्रतिशत रखने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद मुसमलानों और ईसाइयों को भी आरक्षण देने के बारे में क़ानूनी प्रावधान करेगी.

मुख्यमंत्री करुणानिधि ने कहा कि मुसलमानों और ईसाइयों के लिए विशेष आरक्षण के बारे में विस्तृत विवरण डीएमके की सहयोगी पार्टियों से विचार विमर्श करके तैयार किया जाएगा.