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गुरुवार, 05 अप्रैल, 2007 को 21:45 GMT तक के समाचार

पाकिस्तान में मदरसे के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

पाकिस्तान में गुरुवार को सैकड़ों की तादाद में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने एक मदरसे के ख़िलाफ़ अपना विरोध प्रदर्शन किया.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की माँग थी कि देश में कट्टरवादी ताकतों पर लगाम कसनी चाहिए क्योंकि ये असहिष्णुता और हिंसा को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं.

पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में एक मदरसे की कई छात्राओं ने एक महिला और उनकी दो सहयोगियों को यह कहते हुए अगवा कर लिया था कि वो एक वेश्यालय चला रही हैं.

इस जामिया हफ़्सा मदरसे की यह छात्राएँ इस कथित वेश्यालय को बंद किए जाने की मांग कर रही थीं और उनका कहना था कि उन्हें इस्लामी क़ानून के तहत अनैतिक गतिविधियों को बंद कराने का अधिकार है. हालांकि दो दिन बाद इन महिलाओं को छोड़ दिया गया था.

एजेंसियों के मुताबिक इस घटना का विरोध कर रहे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि मदरसे की ये छात्राएँ आम नागरिकों को डराने और उनका शोषण करने का काम कर रही हैं.

पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग और क़रीब दर्जन भर अन्य ग़ैर सरकारी संगठनों की ओर से जारी किए गए बयान में अपील की गई है कि लोग इस तरह की कट्टरवादी सांप्रदायिक ताकतों के ख़िलाफ़ एकजुट होकर सामने आएँ और आने वाली पीढ़ियों को इसके प्रभाव से बचाएँ.

चिंता

इससे पहले मदरसे की ये छात्राएँ एक अवैधानिक तरीके से बनी मस्जिद के हटाने का भी विरोध कर चुकी हैं.

फरवरी महीने में इन छात्राओं ने अधिकारियों को इस मस्जिद को गिराने से रोक दिया था और पास की एक छात्र लाइब्रेरी पर कब्ज़ा कर लिया था.

इन्होंने पिछले दिनों विडियो फ़िल्में बेचने वाले दुकानदारों को भी चेतावनी देते हुए कहा था कि वे विडियो की दुकानें बंद कर दें.

मदरसे की ओर से इस्लामिक क़ानून को देशभर में लागू करने की बात कही जाती रही है और इन्होंने समय समय पर राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के चरमपंथी विरोधी अभियान की आलोचना भी की है.