गुरुवार, 05 अप्रैल, 2007 को 14:09 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, लखनऊ से
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान फ़ैसला सुनाते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों को अल्पसंख्यक समुदाय का दर्जा नहीं दिया जा सकता.
ग़ाजीपुर के अंजुमन मदरसा की याचिका पर ये फ़ैसला सुनाते हुए उच्च न्यायालय का कहना था कि राज्य में मुसलमानों की आबादी 18 प्रतिशत है जबकि रामपुर जैसे कुछ ज़िलों में मुस्लिम समुदाय के सदस्यों की आबादी 50 प्रतिशत से ज़्यादा है.
यह फ़ैसला ऐसे समय पर आया है जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और राजनीतिक दलों और कई मुस्लिम संगठनों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.
उत्तर प्रदेश सरकार इस फ़ैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करेगी.
अनुदान की माँग
अंजुमन मदरसा ने अल्पसंख्यक समुदाय को मिलने वाले अनुदान के मुद्दे पर याचिका दायर की थी.
उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को इस मामले की जाँच का आदेश दिया और वर्ष 1951 और 2001 के जनगणना रिकॉर्ड तलब किए.
न्यायालय ने अपने फ़ैसले में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार मुस्लिम समुदाय की संस्थाओं को अन्य आम संस्थाओं की तरह ही सुविधाएँ उपलब्ध कराए.
अदालत ने फ़िलहाल केवल दो पन्ने का फ़ैसला ही सुनाया है और पूरा फ़ैसला अभी आना बाक़ी है.
उधर उत्तर प्रदेश के महा-अधिवक्ता एसएमए काज़मी ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि न्यायालय ने ये फ़ैसला अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर किया है क्योंकि याचिका में ये मुद्दा उठाया ही नहीं गया था.
उनका कहना था कि ये फ़ैसला विधिसम्मत नहीं है और उत्तर प्रदेश सरकार इस पर पुनर्विचार याचिका दायर करेगी.