शनिवार, 31 मार्च, 2007 को 11:02 GMT तक के समाचार
केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा है कि ओबीसी कोटा पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला क़ानूनी मामला है और विशेषज्ञ इस पर फ़ैसला करेंगे.
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) को आरक्षण पर उनके मंत्रालय की कोई निजी राय नहीं है.
अर्जुन सिंह ने कहा कि संसद ने आरक्षण पर जो क़ानून बनाया था, उससे वो सहमत हैं.
ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी को 27 फ़ीसदी आरक्षण देने के केंद्र सरकार के फ़ैसले को आगामी शैक्षणिक सत्र में लागू करने पर रोक लगा दी है.
जब अर्जुन सिंह जेएनयू पहुँचे, तो उन्हें आरक्षण विरोधी छात्रों के नारों का सामना करना पड़ा. जैसै ही वो अपना भाषण देने के लिए तैयार हुए, 'यूथ फॉर इक्वलिटी' के समर्थकों ने उन्हें काले झंडे दिखाए और उन पर छात्रों को जातीय आधार पर बाँटने का आरोप लगाया.
सीपीआई की माँग
इस बीच केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार को बाहर से समर्थन दे रही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने इस मामले पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग की है.
पार्टी के महासचिव एबी बर्धन ने कहा, "ओबीसी आरक्षण पर रोक दुर्भाग्यपूर्ण है और यह सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विरूद्ध है."
उनका कहना था कि इस फ़ैसले से न्यायपालिका और विधायिका के बीच कटराव पैदा हो सकता है.
उधर एआईएडीएमके की नेता जयललिता ने आरोप लगाया है कि यूपीए सरकार की 'लापरवाही' के कारण ही सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह का फ़ैसला दिया है.