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शुक्रवार, 30 मार्च, 2007 को 15:24 GMT तक के समाचार

'ग्रामीण भारत में ईसाई बेरोज़गार अधिक'

पूरे भारत में किए गए सरकारी संस्था के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि देश के ग्रामीण क्षेत्र में ईसाइयों में बेरोज़गारी की दर अन्य धर्म के लोगों के मुकाबले ज़्यादा है जबकि शहरी क्षेत्र में हिंदुओं और मुसलमानों में बेरोज़गारी की दर एक जैसी है.

ये सर्वेक्षण नेशनल सेंपल सर्वे ऑर्गेनाइज़ेशन (एनएसएसओ) यानि राष्ट्रीय प्रतिदर्शी सर्वेक्षण संगठन ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किया. लेकिन इस सर्वोक्षण में नागालैंड, अंडमान निकोबार द्वीपों और भारत प्रशासित कश्मीर के कुछ दूरदराज़ के इलाक़े शामिल नहीं हैं.

ये सर्वेक्षण 7999 गाँवों और 4602 शहरी इलाक़ों में किया गया जिसमें लगभग एक लाख 25 हज़ार परिवारों को शामिल किया गया.

सर्वेक्षण में पाया गया कि ग्रामीण क्षेत्र में बेरोज़गारी की दर ईसाइयों में सबसे ज़्यादा 4.4 प्रतिशत है जबकि हिंदुओं में ये 1.5 प्रतिशत है और मुसलमानों में ये 2.3 प्रतिशत है.

शहरी क्षेत्र में हिंदुओं और मुसलमानों में बेरोज़गारी की लगभग एक जैसी यानि चार प्रतिशत थी.

ग्रामीण क्षेत्र में लगभग 37 प्रतिशत हिंदू परिवार कृषि संबंधित स्वरोज़गार पर आश्रित हैं जबकि 35 प्रतिशत ईसाई और 26 प्रतिशत मुसलमान कृषि संबंधित स्वरोज़गार पर निर्भर हैं.

उधर ग़ैर-कृषि क्षेत्रों में स्वरोज़गार पर निर्भरता हिंदुओं में 14 प्रतिशत, मुसलमानों में 28 प्रतिशत और ईसाइयों में 15 प्रतिशत पाई गई.

सर्वेक्षण से ये भी पता चला है कि शहरी इलाक़ों में हिंदू परिवारों में 36 प्रतिशत स्वरोज़गार से रोज़ी कमाते हैं जबकि 43 प्रतिशत नियमित रोज़गार पर आश्रित हैं.

शहरी इलाक़ों में रहने वाले मुसलमानों में से 49 प्रतिशत स्वरोज़गार के क्षेत्र में हैं जबकि 30 प्रतिशत नियमित रोज़गार करते हैं.