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शुक्रवार, 30 मार्च, 2007 को 01:59 GMT तक के समाचार

'आरक्षण पर संसद सत्र बुलाया जाए'

तमिलनाडु विधानसभा ने उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी आरक्षण रोकने के अदालती फ़ैसले पर चर्चा के लिए संसद के दोनों सदनों की बैठक बुलाने की माँग की है.

दूसरी ओर आंध्र प्रदेश विधानसभा में इस मुद्दे पर जम कर हंगामा हुआ. विपक्षी तेलुगूदेशम पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से उपजी स्थिति पर विधानसभा में चर्चा कराने की माँग की लेकिन इसकी अनुमति नहीं मिली.

तमिलनाडु विधानसभा ने इस सिलसिले में शुक्रवार को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया. इसमें केंद्र सरकार से आरक्षण के मुद्दे पर 'उचित फ़ैसले' लेने की अपील की गई है.

सदन में यह प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से संसदीय अधिकारों पर असर पड़ा है और यह सामाजिक-शैक्षणिक रुप से पिछड़े वर्गों के हित में नहीं है.

विधानसभा में एआईएडीएमके, पीएमके और कांग्रेस के सदस्यों ने इस मुद्दे पर बहस कराने की माँग की. विधानसभा अध्यक्ष आर अवुदैयप्पन ने इसे स्वीकार करते हुए बाद में बहस कराने की व्यवस्था दी.

उधर आंध्र प्रदेश विधानसभा में तेलुगूदेशम ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश किया लेकिन विधानसभा अध्यक्ष केआर सुरेश ने इसे नामंज़ूर कर दिया.

इससे नाराज़ विपक्षी दलों के सदस्यों ने ज़ोरदार हंगामा शुरू कर दिया जिसके बाद कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित करनी पड़ी.

बंद का आह्वान

तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके गठबंधन ने उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी आरक्षण पर रोक के विरोध में शनिवार को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है.

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 फ़ीसदी आरक्षण देने के केंद्र सरकार के फ़ैसले को आगामी शैक्षणिक सत्र में लागू करने पर रोक लगा दी है.

इस फ़ैसले के बाद तमिलनाडु में सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल दलों की गुरुवार को बैठक हुई जिसमें बंद का आह्वान किया गया

बैठक के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके के नेता एम करुणानिधि ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से उपजी स्थिति पर चर्चा के लिए संसद के दोनों सदनों की बैठक बुलाने की माँग की.

बैठक में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें कहा गया है कि अदालत के फ़ैसले से संसदीय अधिकारों और सामाजिक न्याय को झटका लगा है.

ये पूछे जाने पर कि क्या बंद का आह्वान अदालत की मानहानी नहीं होगी, करुणानिधि ने कहा, "बंद सुप्रीम कोर्ट के ख़िलाफ़ नहीं है बल्कि शोषित वर्गों की भावनाएँ प्रकट करने के लिए है."