बुधवार, 28 मार्च, 2007 को 08:03 GMT तक के समाचार
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनज़र लगभग दो महीने बाद बुधवार से दिल्ली में फिर 'सीलिंग' शुरू हुई है. दिल्ली नगर निगम यानी एमसीडी पुलिस की उपस्थिति में इस अभियान को अंजाम दे रही है.
इस अभियान का मकसद है रिहायशी इलाक़ो में अवैध तौर पर चल रही दुकानों और अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को बंद कराना है.
समाचार एजेंसियों के अनुसार सीलिंग की कार्रवाई पहले ऐसी व्यावसायिक इकाइयों में की जा रही है जो मिश्रित भू-उपयोग यानी 'मिक्स्ड लैंड यूज़' के लिए अधिसूचित सड़कों पर बनी इमारत में ऊपर की मंजिल पर चल रही हैं.
दरअसल, दिल्ली मास्टर प्लान-2021 के मुताबिक मिश्रित भू-उपयोग के तहत सिर्फ़ ग्राउंड फ़्लोर पर ही व्यावसायिक गतिविधियाँ चलाने की इजाज़त है. कुछ जगह पर 'बेसमेंट' में भी ऐसी गतिविधियाँ चल सकती हैं.
एमसीडी ग्राउंड फ़्लोर के अलावा अन्य मंजिलों पर चलने वाली व्यावसायिक इकाइयों को सील करेगी.
एक आकलन के अनुसार इससे लगभग 55 हज़ार इकाइयाँ सीलिंग की दायरे में आ जाएंगी.
नगर निगम ने दिल्ली पुलिस से लिखित में आग्रह किया है कि सीलिंग अभियान दल को कार्रवाई के दौरान पर्याप्त मात्रा में पुलिस बल उपलब्ध कराए जाएँ.
माना जा रहा है कि अगर पर्याप्त पुलिस बल मिला तो दिल्ली के 12 में से 11 ज़ोन में एक साथ सीलिंग की कार्रवाई की जा सकेगी.
पश्चिमी दिल्ली के नरेला ज़ोन में फ़िलहाल सीलिंग नहीं होगी क्योंकि वहाँ किसी भी सड़क को मिश्रित भूमि उपयोग के लिए अधिसूचित नहीं किया गया है.
सीलिंग के लिए सभी ज़ोन में चार से छह टीमों का गठन किया गया है. इस टीम में दिल्ली जल बोर्ड और बिजली कंपनियों के भी कर्मचारी भी होंगे ताकि सील किए गए प्रतिष्ठानों को पानी-बिजली की आपूर्ति बंद की जा सके.