दिल्ली की एक अदालत ने 1984 में हुए सिख दंगों में तीन लोगों को दोषी क़रार दिया है. इन पर एक ही परिवार के तीन सदस्यों को जान से मारने का आरोप था.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेन्द्र कुमार शास्त्री ने हरप्रसाद भारद्वाज, आरपी तिवारी और जगदीश गिरी को एक सिख परवार के तीन सदस्यों मारने का दोषी माना है जिसमें एक पुलिस वाला भी शामिल था.
न्यायालय ने इन्हें भारतीय दण्ड संहिता की धारा 147( दंगा करने) और 302(हत्या करने) के तहत दोषी ठहराया है.
इन लोगों ने एक और दो नवंबर, 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद भड़के सिख-विरोधी दंगों में शिकायकर्ता हरमिंदर कौर के घर पर हमला किया जो पूर्वी दिल्ली में रहती थीं.
हालांकि, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने साक्ष्य न होने की वज़ह से सूरज गिरी और कमलेश नाम की एक महिला आरोपी को रिहा कर दिया.
अभियोजन पक्ष के वक़ील के अनुसार हरमिंदर कौर के पति निरंजन सिंह को एक नवंबर, 1984 को भीड़ ने जलाकर मार डाला.
भीड़ का नेतृत्व ये तीनों दोषी कर रहे थे.
हत्या
निरंजन सिंह दिल्ली पुलिस में हेड कॉन्सटेबल थे और उस समय शाहदरा रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी कर रहे थे.
दोषियों ने पहले निरंजन सिंह का पीछा किया और फ़िर मानसरोवर पार्क में उनके घर के सामने उन्हें मार डाला.
अभियुक्तों ने अगले दिन हरमिंदर कौर के 17 वर्षीय बेटे गुरपाल सिंह और दामाद महेन्दर सिंह को भी मार डाला.
1996 में सिख-विरोधी दंगों की जाँच करने के लिए बनी जैन समिति के सामने हरमिंदर कौर के एफ़िडेविट जमा करने के बाद इस मामले में प्राथमिकी दर्ज़ की गई थी.
पूर्व केन्द्रीय मंत्री एचकेएल भगत को भी इस मामले में आरोपी ठहराया गया था लेकिन पर्याप्त सबूत न होने की वज़ह से उन्हें छोड़ दिया गया.