शुक्रवार, 23 मार्च, 2007 को 08:55 GMT तक के समाचार
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 'सीलिंग' को लेकर दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम यानी एमसीडी को कड़ी फटकार लगाई है और 28 मार्च से 'सीलिंग' अभियान फिर शुरू करने को कहा है.
इस 'सीलिंग' अभियान का मकसद दिल्ली के रिहायशी इलाक़ों में चल रही अवैध दुकानों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को बंद कराना है.
समाचार एजेंसियों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने आदेश में कहा कि दिल्ली के नए मास्टर प्लान 2021 के दायरे के बाहर सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों को सील किया जाए.
ये निर्देश न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत, न्यायमूर्ति पीके बालासुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति डीके जैन की तीन सदस्यीय पीठ ने दिया है.
उन्होंने अपने आदेश पर दिल्ली सरकार और एमसीडी के राज्य निर्वाचन आयोग से निर्देश पाने के रवैये को दुर्भाग्यपूर्ण बताया.
न्यायालय ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उसके आदेश पर राज्य निर्वाचन आयोग से निर्देश माँगे गए."
दिल्ली सरकार ने वर्तमान में जारी नगर निगम चुनाव प्रक्रिया के मद्देनज़र सीलिंग अभियान शुरू करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य निर्वाचन आयोग से निर्देश माँगे थे.
दिल्ली नगर निगम के चुनाव पाँच अप्रैल को होने हैं और मतगणना सात अप्रैल को होगी.
पीठ ने अतिरिक्त सोलीसिटर जनरल अमरिंदर सरन की उस दलील को भी ख़ारिज कर दिया जिसमें उन्होंने निगम चुनावों के मद्देनज़र सीलिंग अभियान स्थगित करने की गुज़ारिश की थी.
राहत नहीं
दरअसल, पीठ ने पहले तो सीलिंग अभियान छह अप्रैल से शुरू करने का आदेश दिया था.
लेकिन जब अदालत की मदद के लिए नियुक्त वकील रंजीत कुमार ने शिकायत की कि आदेश पर स्पष्टीकरण के लिए न्यायालय के दरवाजा खटखटाने के बजाय राज्य सरकार ने राज्य निर्वाचन आयोग से राय माँगी है, पीठ ने नया फ़रमान सुना दिया.
हालाँकि पीठ ने अतिरिक्त सोलीसिटर जनरल को थोड़ी सी राहत देते हुए सीलिंग अभियान 27 मार्च तक टाल दिया.
सरन ने रामनवमी पर्व के मद्देनज़र न्यायालय से सीलिंग अभियान कम से कम 27 मार्च तक टालने का अनुरोध किया था.
इसके अलावा पीठ ने यह भी साफ़ किया कि दिल्ली नगर निगम चुनाव प्रक्रिया को देखते हुए चार अप्रैल से सात अप्रैल तक सीलिंग नहीं होगी.