शुक्रवार, 23 मार्च, 2007 को 17:45 GMT तक के समाचार
नेपाल के पूर्ववर्ती माओवादी विद्रोहियों ने अपने समर्थकों की हत्या के विरोध में काठमांडू और भारत की राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया है.
ग़ौरतलब है कि दक्षिणी नेपाल के गौर इलाक़े में बुधवार को मधेशियों के प्रतिदंद्वी संगठनों के बीच हुई झड़प में कम से कम 27 लोग मारे गए थे. माओवादियों का कहना है कि मारे गए लोगों में से अधिकतर उनके समर्थक थे.
पिछले साल माओवादी विद्रोहियों के साथ हुए शांति समझौते के बाद यह अब तक की सबसे हिंसक घटना है. इस झड़प में 40 से ज़्यादा लोग घायल भी हो गए.
पुलिस का कहना है कि दोनों विरोधी गुटों के बीच एक ही मैदान पर सभा आयोजित करने को लेकर संघर्ष हुआ था.
इस घटना के बाद से ही गौर में कर्फ़्यू लगा दिया गया है.
विरोध
भारत की राजधानी दिल्ली में जंतर मंतर पर इस घटना के विरोध में शुक्रवार को नेपाली जनाधिकार सुरक्षा परिषद के कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाला.
इस संगठन के नेता टीबी पाठक ने बीबीसी को बताया कि शांति समझौते के बाद इस तरह की घटना नेपाल के भविष्य के लिए ठीक नहीं है.
उन्होंने दावा किया कि मधेशी जनाधिकार फ़ोरम के लोगों ने अचानक उनके समर्थकों पर हमला कर दिया. टीबी पाठक का कहना था, "विरोधी गुटों के लोगों ने स्वचालित हथियारों से ताबड़तोड़ गोलियाँ चलाईं और कई महिलाओं के साथ दुष्कर्म भी किया गया."
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त लुई आर्बर ने इस हत्याकांड की निंदा करते हुए दोषियों को सज़ा देने की माँग की है.
गौर स्थित बीबीसी संवाददाता के मुताबिक ऐसा बताया जा रहा है कि मधेशी जनाधिकार फ़ोरम के लोगों ने माओवादियों के मंच में आग लगा दी.