http://www.bbcchindi.com

गुरुवार, 22 मार्च, 2007 को 09:05 GMT तक के समाचार

निठारी मामले में आरोप पत्र दाखिल

केंद्रीय जाँच एजेंसी यानी सीबीआई ने निठारी कांड से संबंधित हत्या के एक मामले में मोनिंदर सिंह पंधेर, उनके नौकर सुरेंद्र कोली और एक महिला पुलिसकर्मी को अभियुक्त बनाया है.

निठारी कांड की जाँच कर रही सीबीआई ने गुरुवार को ग़ाज़ियाबाद की एक अदालत में तीनों के ख़िलाफ़ आरोप पत्र दाखिल किया.

सीबीआई के संयुक्त निदेशक अरूण कुमार ने पत्रकारों को बताया कि पंधेर पर भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश रचने, अपने घर में 'कॉल गर्ल' बुलाने और पायल के परिजनों को धमकाने का आरोप लगाया गया है.

दूसरी ओर उनके नौकर सुरेंद्र कोली पर पायल के अपहरण, बलात्कार और उनकी हत्या करने का आरोप लगाया गया है.

बुधवार को गिरफ़्तार की गईं उत्तर प्रदेश पुलिस की बर्ख़ास्त सब इंस्पेक्टर सिमरनजीत कौर को भी आरोप पत्र में सह अभियुक्त बनाया गया है. उन पर पायल की हत्या के मामले को दबाने में सहयोग करने का आरोप लगाया गया है.

पिछले साल दिसंबर में राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा के निठारी गाँव में पंधेर के घर के पास से कई बच्चों और महिलाओं के नरकंकाल मिलने से सनसनी फैल गई थी.

सीबीआई अधिकारियों ने कहा है कि सिमरनजीत कौर उस समय निठारी पुलिस चौकी की प्रभारी थीं जब वहाँ से बच्चे लापता हुए थे. उन पर मामले में लापरवाही बरतने आरोप है.

नरकंकाल मिलने की घटना के बाद सिमरनजीत कौर को उत्तर प्रदेश सरकार ने बर्ख़ास्त कर दिया था.

इक़बालिया बयान

अरूण कुमार ने बताया कि सुरेंद्र कोली ने पूछताछ के दौरान बच्चों की हत्या करने के बाद मानव अंगों को खाने की बात स्वीकार की है.

उन्होंने कहा, "सुरेंद्र ने अपने इक़बालिया बयान में कहा है कि उसने दो बच्चों के अंगों को प्रेशर कुकर में उबाल कर खाया और एक के लीवर को कच्चा खा गया."

सीबीआई के मुताबिक निठारी गाँव से जितने बच्चे गायब हुए थे, उनमें से आठ की पहचान डीएनए टेस्ट के आधार पर हो गई है.

आरोप पत्र में पंधेर को हत्या का अभियुक्त नहीं बनाने पर सीबीआई अधिकारियों का कहना था, "मोबाइल सिम की जाँच से यह पता चला है कि पहली हत्या के समय पंधेर ऑस्ट्रेलिया में थे. दूसरी हत्या के समय भी वो विदेश में थे. इसके बाद हुई नौ हत्यायों के दौरान भी वह नोएडा स्थित अपने घर पर नहीं थे."

अरूण कुमार का कहना था कि पूछताछ के दौरान सुरेंद्र कोली ने जब हत्या करने की बात स्वीकार की तो ऐसा नहीं लगा कि उन्हें अपने किए पर कोई पछतावा है.