गुरुवार, 22 मार्च, 2007 को 10:18 GMT तक के समाचार
निर्वासित जीवन जी रहे पाकिस्तान के दो पूर्व प्रधानमंत्रियों बेनज़ीर भुट्टो और नवाज़ शरीफ़ ने मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी के निलंबन का विरोध किया है.
दोनों नेताओं ने पश्चिमी देशों पर पाकिस्तान में 'सैन्य तानाशाही' की अनदेखी करने का आरोप लगाया.
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की नेता बेनज़ीर भुट्टो और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता नवाज़ शरीफ़ ने बुधवार को लंदन में इस मामले में चर्चा की.
पीपीपी के नेता परवेज़ रशीद ने बीबीसी को बताया कि दोनों नेताओं ने जस्टिस चौधरी के निलंबन के ख़िलाफ़ 26 मार्च को पूरे पाकिस्तान में विरोध दिवस मनाने का फ़ैसला किया है.
उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का संचालन 'एलायंस फॉर द रेस्टोरेशन ऑफ डेमोक्रेसी' यानी एआरडी के बैनर तले किया जाएगा और इसमें अन्य दल भी शामिल हो सकते हैं.
आंदोलन
रशीद ने कहा कि पीपीपी के नेता मख़दूम अमीन फ़हीम और पीएमएल के नेता गौस अली शाह मिल कर आंदोलन का स्वरुप तय करेंगे.
नवाज़ शरीफ़ और बेनज़ीर भुट्टो की मुलाक़ात ऐसे समय में हुई है जब ये कहा जा रहा था कि दोनों नेताओं के बीच दूरियाँ बढ़ रही हैं.
दोनों नेताओं ने कहा कि जस्टिस इफ़्तिख़ार चौधरी को निलंबित करने के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के फ़ैसले से पाकिस्तान में चुनाव प्रक्रिया में मुश्किलें आएंगी.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के सरकारी संस्थानों पर जनरल मुशर्रफ़ लगातार हमले कर रहे हैं लेकिन ब्रिटेन और अमरीका इस मामले पर चुप हैं.
भुट्टो ने पत्रकारों से कहा, "अगर अफ़ग़ानिस्तान में लोकतंत्र इतना ज़रूरी है तो पाकिस्तान में भी लोकतंत्र की रक्षा होनी चाहिए. अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को इस पर ध्यान देना चाहिए."
परवेज़ रशीद ने इस बात को दोहराया कि पाकिस्तान में आम चुनाव से पहले बेनज़ीर भुट्टो और नवाज़ शरीफ़ पाकिस्तान जाएंगे.
नवाज़ शरीफ़ वर्ष 2000 से ही सऊदी अरब मे निर्वासन का जीवन बिता रहे हैं. समझौते के तहत वो 2010 तक पाकिस्तान वापस नहीं लौट सकते हैं.