शुक्रवार, 16 मार्च, 2007 को 12:34 GMT तक के समाचार
प्रेस की आज़ादी के लिए काम करने वाली संस्था 'रिपोर्टर्स विदाउट बोर्डर्स' ने मीडिया पर अंकुश लगाने के लिए पाकिस्तान सरकार की निंदा की है.
संस्था का कहना है कि पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी के निलंबन के ख़िलाफ़ वकीलों के आंदोलन का टेलीविज़न चैनलों पर कवरेज में रुकावट डालने और अग्रणी अख़बार 'डॉन' को सरकारी विज्ञापन रोकने का क़दम ग़लत था.
संस्था की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है, "हमें डर है कि इस साल राष्ट्रपति चुनाव के दौरान मीडिया की स्वतंत्रता पर सरकार की ओर से हमला हो सकता है."
पिछले 12 मार्च को पाकिस्तान के मीडिया नियामक प्राधिकरण ने दो चैनलों 'आज' और 'जीयो टीवी' के प्रसारण को कई मिनटों तक बाधित रखा. उस दिन ये चैनल वकीलों के आंदोलन का फुटेज दिखा रहे थे.
निलंबन
नौ मार्च को राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने मुख्य न्यायाधीश चौधरी को पद का दुरुपयोग करने के आरोप में निलंबित कर दिया था.
दूसरी ओर इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी ने उन पर लगे पद के दुरुपयोग के आरोपों से इनकार किया है.
बीसीसी संवाददाता के मुताबिक़ कई लोगों का मानना है कि मुख्य न्यायाधीश को इसलिए निलंबित किया गया क्योंकि उन्होंने ऐसे मामले उठाए, जिनमें सरकार को ही कठघरे में खड़ा किया गया था.
इनमें कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं के ग़ायब होने के मामले भी हैं. जिनके बारे में कहा जाता है कि इन्हें सुरक्षा बलों ने कथित रूप से हिरासत में रखा था.
वे मंगलवार को इस्लामाबाद के सुप्रीम कोर्ट में एक पैनल के सामने पेश हुए. इस मामले की सुनवाई शुक्रवार तक स्थगित कर दी गई है.
सर्वोच्च न्यायिक परिषद इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी के ख़िलाफ़ पद के दुरुपयोग के आरापों की जाँच कर रहा है.