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मंगलवार, 13 मार्च, 2007 को 02:55 GMT तक के समाचार

भारत पाकिस्तान की बातचीत आज से

भारत और पाकिस्तान के बीच चल रही शांति प्रक्रिया के तहत विदेश सचिव स्तरीय वार्ता का चौथा दौर आज से इस्लामाबाद मे शुरु हो रहा है.

इस बातचीत में जहां भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश सचिव शिवशंकर मेनन करेंगे वहीं पाकिस्तानी दल की अगुआई करेंगे रियाज़ मोहम्मद खान.

बातचीत में जहां पिछले दौर में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी वहीं आने वाले समय में विश्वास बहाली के उपायों और कश्मीर के मुद्दे पर बातचीत संभव है.

दोनों देशों की बातचीत की पूर्व संध्या पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता तसनीम असलम ने संकेत दिए कि इस दौरान वीज़ा नियमों में ढील देने के साथ साथ कुछ और समझौते भी किए जा सकते हैं.

उनका कहना था ' हमें उम्मीद है कि कुछ समझौतों को अंतिम रुप दिया जा सकेगा. वीज़ा नियमों में नरमी और कमांडरों की बैठक इनमें प्रमुख हो सकता है.'

उनका कहना था कि वार्ता के चौथे दोर में दोनों पक्ष कश्मीर के बारे में भी बात करेंगे. उनका कहना था कि अब कश्मीर के मसले पर विश्वास बहाली से आगे बढ़कर विवाद सुलझाने जैसे कदमों पर चर्चा होनी चाहिए क्योंकि कश्मीर मुद्दे के हल से क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का माहौल बनेगा.

दो दिनों तक चलने वाली इस वार्ता में आतंकवाद का मुद्दा छाए रहने की संभावना जताई जा रही है.

पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं कि इस वार्ता में हाल में बने आतंकवाद निरोधक साझा तंत्र पर ही बातचीत होगी क्योंकि पिछले कुछ दिनों में पूरे दक्षिण एशिया और ख़ासकर भारत और पाकिस्तान में चरमपंथी गतिविधियां बढ़ी है.

कश्मीर के बारे मे पूछे जाने पर शशांक कहते हैं कि दोनों पक्षों ने अभी तक कश्मीरी नेताओं के साथ बातचीत को आगे नहीं बढ़ाया है इसलिए कहना मुश्किल है कि इस पर कोई ख़ास प्रगति फिलहाल संभव है.

वो कहते हैं कि भारत को आतंकवाद संबंधी सबूतों पर प्रगति की बहुत उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए.

विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें श्रीनगर और मुज़फ़्फ़राबाद के बीच ट्रक सेवा, वीज़ा देने की प्रक्रिया आसान करना, मछुआरों और दूसरे क़ैदियों की जल्द रिहाई जैसे मुद्दे शामिल हैं.

वार्ता के दौरान पाकिस्तान भारतीय प्रशासित जम्मू-कश्मीर से सेना को हटाने की माँग रख सकता है. जबकि भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इस तरह का कोई क़दम तभी उठाया जा सकता है जब वहाँ चरमपंथ का सफाया हो जाएगा.

भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे के हल के लिए वह किसी भी प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन वह कोई ऐसा प्रस्ताव स्वीकार नहीं करेगा जिससे देश की संप्रभुता कमजोर पड़े या सीमाएं बदले.

भारत लगातार कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे का हल देश के संविधान के दायरे के अंदर ही खोजना होगा.