सोमवार, 12 मार्च, 2007 को 10:43 GMT तक के समाचार
भारत और पाकिस्तान के बीच जारी शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए समग्र वार्ता का चौथा दौर मंगलवार से शुरू हो रहा है जिसके लिए भारतीय विदेश सचिव आज पाकिस्तान रवाना हो रहे हैं.
भारत के विदेश सचिव शिवशंकर मेनन और पाकिस्तान के विदेश सचिव रियाज़ मोहम्मद ख़ान समग्र वार्ता के चौथे दौर की शुरुआत करने के साथ ही पिछले तीन दौर की समीक्षा भी करेंगे.
इस्लामाबाद में दो दिनों तक चलने वाली विदेश सचिव स्तरीय वार्ता में आतंकवाद का मुद्दा छाए रहने की संभावना है. इसके अलावा दोनों पक्ष जम्मू-कश्मीर और विश्वास बहाली के उपायों पर भी चर्चा करेंगे.
इसमें श्रीनगर और मुज़फ़्फ़राबाद के बीच ट्रक सेवा, वीज़ा देने की प्रक्रिया आसान करना, मछुआरों और दूसरे क़ैदियों की जल्द रिहाई जैसे मुद्दे शामिल हैं.
वार्ता के दौरान पाकिस्तान भारतीय प्रशासित जम्मू-कश्मीर से सेना को हटाने की माँग रख सकता है. जबकि भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इस तरह का कोई क़दम तभी उठाया जा सकता है जब वहाँ चरमपंथ का सफाया हो जाएगा.
विभिन्न मुद्दे
भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे के हल के लिए वह किसी भी प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन वह कोई ऐसा प्रस्ताव स्वीकार नहीं करेगा जिससे देश की संप्रभुता कमजोर पड़े या सीमाएं बदले.
भारत लगातार कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे का हल देश के संविधान के दायरे के अंदर ही खोजना होगा.
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार शिवशंकर मेनन वार्ता के दौरान रियाज़ मोहम्मद ख़ान को आतंकवाद के मसले पर भारत की चिंता के बारे में बताएंगे और वह जोर देंगे कि शांति प्रक्रिया के पक्ष में जनमत बने रहने के लिए चरमपंथ का ख़त्म होना ज़रूरी है.
भारत का कहना है कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर, पाकिस्तानी पंजाब और उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत में चरमपंथियों का ढाँचा बरकरार है, जो उसके लिए चिंता का एक बड़ा विषय है. इसके साथ ही घुसपैठ के आँकड़ों में भी कोई गिरावट नहीं आई है.
ग़ौरतलब है कि पिछले सप्ताह आतंकवाद निरोधक साझा तंत्र की बैठक के दौरान भारत ने अपनी ज़मीन पर होने वाली चरमपंथी गतिविधियों से जुड़े सबूत पाकिस्तान को सौंपे थे.
वीज़ा के मुद्दे पर भारत प्रक्रिया को उदार बनाना चाह रहा है. भारतीय पक्ष इसके लिए पाकिस्तान को राजी करने की कोशिश करेगा.
पाकिस्तान ने इससे पहले नई वीज़ा प्रणाली के लिए एक मसौदा पेश किया था, लेकिन पाया गया कि यह वर्तमान प्रणाली से भी कठिन है इसलिए उसे ख़ारिज कर दिया गया था.