शुक्रवार, 09 मार्च, 2007 को 12:08 GMT तक के समाचार
डेमियन ग्रैमैटिकास
बीबीसी संवाददाता, चेन्नई से
दो साल पहले सुनामी की लहरें चेन्नई में रहने वाली लता कला के पति की नाव और मछली पकड़ने के लिए जाल को भी अपने साथ बहाकर ले गई थी.
लहरों में समाने के बाद इस परिवार के लिए दो जून की रोटी का इतंजाम करना भी मुश्किल हो गया और मजबूरी में लता ने पिछले दिनों अपनी किडनी यानी गुर्दा बेच दिया.
लता के कूल्हे के ऊपर अभी भी आठ इंच लंबे घाव का निशान है और उसे देर तक बैठने या खड़े रहने में तकलीफ़ होती है.
लता ने कहा,''डॉक्टर ने बताया था कि मुझे सांस लेने में दिक्कत होगी और पीठ में दर्द रहेगी. अगर मैं भारी सामान उठा लूँगी तो सांस उखड़ने लगेगी. इसके बावजूद मैंने गुर्दा बेचने का फ़ैसला लिया क्योंकि कर्ज़ चुकाने के साथ बच्चे भी पालने हैं.''
ये कहानी सिर्फ़ लता की नहीं है. सूनामी आए दो साल बीत चुके हैं और अभी तक कई लोग सिर के ऊपर छत और रोज़ी-रोटी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं.
इनमें से कई अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अपने ही अंग बेच चुके हैं या फिर आने वाले दिनों में बेचने पर विचार कर रहे हैं.
बिचौलियों की ठगी
पुलिस कम-से-कम एक दर्जन ऐसे मामलों की जाँच कर रही है, जिसमें लोगों ने अंग प्रत्यारोपण के लिए किडनी बेच दी.
जब यह मामला सामने आया तो बीबीसी को बताया गया कि कम-से-कम 30 लोग अपना गुर्दा बिकने का इंतजार कर रहे हैं.
गुर्दा बेचने वाले सभी लोग मछुआरों के समुदाय से हैं और इन सभी लोगों ने त्रासदी में अपने घर और नाव गँवा दिए थे.
तमिलनाडु सरकार ने सबको साल भर के भीतर फिर से घर बना देने का वादा किया था लेकिन यह पूरा नहीं हो सका.
घर-बार खो बैठे ऐसे एक हज़ार मछुआरों को उत्तरी चेन्नई में अस्थाई रूप से बनाए गए सूनामी नगर में ठहराया गया है.
इस कैंप की स्थिति भी अच्छी नहीं है और कुछ लोग भीख माँगते देखे जा सकते हैं.
राहत संस्था करूणालय के निदेशक डॉक्टर पॉल सुंदर सिंह कहते हैं,''ऐसी स्थिति में बिचौलियों की चाँदी हो गई है. वे इन लोगों को समझाते हैं कि आप मरीज़ की मदद करने के साथ पैसा भी कमा सकते हैं.''
त्रासदी की मार झेल चुके ये लोग यहाँ भी ठगे जाते हैं. इन लोगों को गुर्दे के बदले 50 हज़ार से एक लाख तक की पेशकश की गई थी लेकिन बिचौलियों ने पूरे पैसे नहीं दिए.
बीबीसी संवाददाता की कम से कम ऐसे छह लोगों से मुलाकात हुई जिन्हें बिचौलियों ने गुर्दा बेचने के बाद पूरे पैसे नहीं दिए.