गुरुवार, 08 मार्च, 2007 को 08:41 GMT तक के समाचार
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि नक्सलवाद भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है और यह सिर्फ़ ताकत से ख़त्म नहीं हो सकता.
संसद के बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई बहस का जवाब देते हुए डॉ सिंह ने कहा कि उन्होंने नक्सली हिंसा पर विचार के लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई थी.
प्रधानमंत्री ने कहा कि वे इस मसले पर राज्यों से लगातार संपर्क में हैं और केंद्र सरकार उन्हें हर संभव मदद मुहैया कराएगी.
साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि नक्सली हिंसा को सिर्फ़ सुरक्षा ढाँचा मजबूत बना कर ख़त्म नहीं किया जा सकता बल्कि मूल समस्या के सामाजिक-आर्थिक पहलू पर भी ध्यान देने की ज़रूरत है.
डॉ सिंह का कहना था, "हम उन कारणों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते जिसके चलते आदिवासियों और समाज के एक तबके में असंतोष है. इसके लिए सरकार रोज़गार गारंटी योजना, पिछड़े इलाक़ों के विकास और आदिवासियों को ज़मीन दिलाने की योजना पर काम कर रही है."
गृह मंत्रालय
प्रधानमंत्री ने कहा है कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में गृह मंत्रालय का रिकॉर्ड राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के रिकॉर्ड से बेहतर रहा है क्योंकि चरमपंथी घटनाएँ होने के बावजूद कहीं भी सांप्रदायिक हिंसा को भड़कने नहीं दिया गया.
संसद के बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई बहस का जवाब देते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर चाहे नक्सलवादी हिंसा, पूर्वोत्तर राज्यों या फिर जम्मू-कश्मीर में हालात पर नज़र डालें, यूपीए सरकार के कार्यकाल में स्थिति बेहतर रही है.
उनका कहना था,"गोधरा की घटना के बाद गुजरात में हिंसा भड़की थी लेकिन मुंबई धमाकों के बाद ऐसा नहीं होने दिया गया बल्कि हज़ारों लोग शांति बनाए रखने के पक्ष में आगे आए."
प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि देश के कुछ हिस्सों से सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिशों की ख़बरें मिल रही हैं लेकिन यूपीए सरकार किसी को भी लोकतांत्रिक परंपराओं और धर्मनिरपेक्षता से खिलवाड़ नहीं करने देगी.
पानी का मुद्दा
असम का ज़िक्र करते हुए प्रधानमंत्री का कहना था कि भारत कभी भारतवासियों के साथ बातचीत करने से पीछे नहीं हटा लेकिन किसी को भी देश की एकता और अखंडता से खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा और निर्दोश लोगों के हत्यारों को बख्शा नहीं जाएगा.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे पानी को राष्ट्रीय संपदा के रूप में देखें और ध्यान दें कि इस विषय पर दरारें न पैदा हों.
'कृषि संबंधित क्षेत्रीय योजनाएँ'
कृषि क्षेत्र के उत्पादन, महँगाई और बेरोज़गारी पर ध्यान केंद्रित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "कृषि क्षेत्र में उत्पादन के रुके हुए विकास दर की चुनौती का सामना करने के लिए योजना आयोग को विशेष क्षेत्रीय योजनाएँ बनाने को कहा गया है."
उनका कहना था कि केवल कृषि क्षेत्र पर चर्चा के लिए राष्ट्रीय विकास परिषद की एक बैठक बुलाई गई है.
आर्थिक विकास की बात करते हुए मनमोहन सिंह का कहना था कि ज़रूरत ये है कि लोग कृषि क्षेत्र की जगह सेवा क्षेत्र और ग़ैर-कृषि क्षेत्रों में
अपना ध्यान लगाएँ.
महँगाई पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री का कहना था कि माँग और आपूर्ति के बीच संतुलन कायम करने की कोशिश हो रही है और महँगाई में पिछले कुछ हफ़्तों में एक प्रतिशत कमी आई है.
उनका कहना था कि आयात बढ़ाई जा सकती हैं लेकिन ध्यान में रखना ज़रूरी है कि इससे घरेलु बाज़ार पर असर न पड़े क्योंकि कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल और खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने का रुझान है.
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धादेव भट्टाचार्य का हवाला देते हुए उन्होंने कहा के वे उनके उस कथन से सहमत हैं कि बड़े पैमाने पर देश के औद्योगिकरण की ज़रूत है.