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मंगलवार, 27 फ़रवरी, 2007 को 02:39 GMT तक के समाचार

राजीव खन्ना
बीबीसी संवाददाता, अहमदाबाद

गोधरा मामला अब भी सवालों के दायरे में

गोधरा कांड के पाँच साल पूरे होने के बाद भी यह मामला क़ानूनी प्रक्रियायों में फँसा है. घटना के बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा में सैंकड़ों लोग मारे गए थे.

27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में कथित तौर पर आग लगाए जाने से 59 हिंदू तीर्थयात्रियों के मारे जाने के बाद पूरे गुजरात में सांप्रदायिक हिंसा फैल गई थी.

गोधरा कांड के बाद भड़की सांप्रदायिक हिंसा में दो हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

गोधराकांड में मारे गए लोगों को रेलवे प्राधिकरण से मुआवजा तो मिल गया पर इस मामले की अदालती सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट की रोक अभी भी कायम है.

इस बीच मामले की तकनीकी जाँच करने वाले यूसी बैनर्जी आयोग कि रिपोर्ट और अभियुक्तों पर लगे आतंकवाद निरोधक क़ानून यानी पोटा के मसले पर आई केंद्रीय पोटा समीक्षा समिति की रिपोर्ट से उपजे सवाल अभी भी कायम हैं.

क़ानूनी मामले

विश्व हिंदू परिषद के वकील दीपक शुक्ला का कहना है कि रेलवे ट्राइब्यूनल में चले लगभग सभी मामलों का निपटारा हो चुका है.

वो कहते हैं, "इस ट्राइब्यूनल की जाँच से यह साफ है कि ट्रेन पर हिंसक हमला हुआ था. लेकिन आपराधिक मामले की सुनवाई पर कुछ कहना ठीक नहीं है क्योंकि मामला अदालत में है."

दीपक शुक्ला का कहना है कि नानावती और जस्टिस केजी शाह आयोग ने भी जाँच का काम लगभग पूरा कर लिया है.

दूसरी ओर जनसंघर्ष मंच के वकील मुकुल सिन्हा का कहना है कि गोधराकांड और इसके बाद हुए दंगों के मामले के निपटारे में देरी हो रही है. हालाँकि जाँच आयोग के तौर तरीक़ों को वो निष्पक्ष मानते हैं.