गुरुवार, 22 फ़रवरी, 2007 को 11:11 GMT तक के समाचार
भारत प्रशासित कश्मीर में डीएनए परीक्षण के बाद उस व्यक्ति की पहचान आम नागरिक के तौर पर की गई है जो पिछले साल दिसंबर में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था.
अब्दुल रहमान पद्दर नामक इस नागरिक का शव पुलिस ने तीन हफ्ते पहले यह कहते हुए दफनाया था कि वह पाकिस्तानी चरमपंथी है.
अब डीएनए परीक्षण के बाद पुष्टि हो गई है कि पद्दर कश्मीर का रहने वाला था और कारपेंटर का काम करता था.
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक फॉरुक अहमद ने बीबीसी को बताया कि पुलिस को डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट मिल गई है और कुछ अन्य फोरेंसिक विवरण जल्दी ही मिल जाएंगे.
फ़ारुक अहमद कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ के चार मामलों की तहकीकात कर रही टीम के प्रमुख हैं.
इस संदर्भ में गांदरबल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ( एसएसपी) समेत सात पुलिस अधिकारियों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है.
सेना ने इस तरह के कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ों में सैनिकों के शामिल होने की अलग से जांच के आदेश भी दिए हैं.
पद्दर आठ दिसंबर से लापता था और उसे उसी रात पुलिस के आंतकवाद निरोधक टास्क फोर्स ने गोली मार दी थी.
पद्दर के परिवार का कहना है कि पद्दर ने एक पलिस अधिकारी को सरकारी नौकरी के लिए अस्सी हज़ार रुपए दिए थे. यह पुलिस अधिकारी अब हिरासत में है.
इस अधिकारी ने पद्दर को नौकरी को नहीं दी बल्कि पद्दर को गोली मारकर चरमपंथी मारने के लिए सम्मान पाने का दावा भी कर दिया.
पिछले अठारह वर्षों में राज्य में हज़ारों की संख्या में लोग लापता है और इनमें से कई लोग पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद लापता हुए हैं.
इन लापता लोगों के परिवारजन इन मामलों की जांच की मांग कर रहे हैं ताकि कम से कम इन लापता लोगों को मृत घोषित किया जा सके.