बुधवार, 21 फ़रवरी, 2007 को 17:40 GMT तक के समाचार
समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया है. हालाँकि सरकार की सेहत पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.
सपा के 38 सांसद हैं और यह मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के बाद सरकार को बाहर से समर्थन दे रही दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी. वामपंथी गठबंधन के पास 59 सांसद हैं जो यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं.
कांग्रेस और सपा के रिश्ते लगातार बिगड़ रहे थे और इसके मद्देनज़र सपा के इस फ़ैसले की संभावना पहले से जताई जा रही थी.
ग़ौरतलब है कि कांग्रेस ने कुछ दिनों पहले ही उत्तर प्रदेश में सपा के नेतृत्व वाली सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था.
सपा के अलावा तेलंगना राष्ट्र समिति यानी टीआरएस ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसने लगभग छह माह पहले यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया था.
सरकार पर असर नहीं
545 सदस्यीय लोकसभा में यूपीए सरकार को 300 से ज़्यादा सांसदों का समर्थन प्राप्त है, इसलिए सपा के समर्थन वापस लेने से भी सरकार की स्थिरता पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
हालाँकि सपा के नेता और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने वामपंथी दलों से भी यूपीए सरकार से समर्थन वापस लेने की अपील की है.
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में उनकी सरकार को बर्ख़ास्त करने के लिए कांग्रेस ने सांप्रदायिक दलों से हाथ मिला लिया है, इसलिए ऐसी सरकार को समर्थन जारी रखना मुनासिब नहीं था.
इस बीच चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में सात चरणों में विधानसभा चुनाव कराने का फ़ैसला किया है.
इस बाबत कांग्रेस का कहना है कि चुनाव की घोषणा का ये मतलब नहीं है कि राज्य सरकार को बर्ख़ास्त करना असंवैधानिक हो जाएगा.
कांग्रेस के नेता जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि मुलायम सिंह सरकार के रहते उत्तर प्रदेश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होने पर अभी भी आशंका है.