सोमवार, 19 फ़रवरी, 2007 को 11:48 GMT तक के समाचार
दिल्ली हाई कोर्ट ने तंदूर हत्याकांड में दोषी ठहराए गए सुशील शर्मा की मौत की सज़ा बरकरार रखी है. पूर्व कांग्रेस नेता सुशील शर्मा पर अपनी पत्नी नैना साहनी की हत्या करने और फिर उनका शव तंदूर में जलाने का आरोप था.
जस्टिस आरएस सोढ़ी और जस्टिस पीके भसीन की खंडपीठ ने अपने फ़ैसले में नैना साहनी की हत्या को 'दुष्टता की कार्रवाई' बताया और सज़ा के ख़िलाफ़ सुशील शर्मा की याचिका ख़ारिज कर दी.
नवंबर 2003 में दिल्ली की एक अदालत ने सुशील शर्मा को मौत की सज़ा सुनाई दी. सोमवार को अपने फ़ैसले में जस्टिस सोढ़ी और जस्टिस भसीन की खंडपीठ ने कहा कि ये बात ग़लत है कि सुशील शर्मा को निष्पक्ष न्याय नहीं मिला.
अदालत ने सुशील शर्मा की उस अपील को भी ख़ारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि यह घटना उकसावे में हो गई थी और इसलिए यह अलग श्रेणी में आता है और इसलिए इसमें मौत की सज़ा नहीं मिलनी चाहिए.
न्याय व्यवस्था का मज़ाक
खंडपीठ ने कहा, " यह घटना किसी उकसावे में नहीं हुई थी. यह बर्बरता थी और इस मामले में कोई छूट नहीं मिल सकती. सुशील शर्मा को मानव जीवन की कोई कद्र नहीं."
अदालत ने कहा कि यह न्याय व्यवस्था का मज़ाक ही होगा, अगर सुशील शर्मा की याचिका स्वीकार की जाती है.
इस मामले में दाख़िल किए गए आरोप-पत्र के अनुसार सुशील शर्मा ने अवैध संबंधों के शक में नैना साहनी की गोली मारकर हत्या कर दी थी.
फिर शव के कई टुकड़े करके उन्हें दिल्ली के एक रेस्तराँ के तंदूर में झोंक दिया गया था. तंदूर से उठते धुएँ और मानव शरीर के जलने की गंध ने वहाँ से गुज़र रहे एक पुलिस कांस्टेबल का ध्यान खींचा था.
उसके बाद पुलिस ने छापा मार कर तंदूर से नैना साहनी के शव के अधजले हिस्से बरामद किए थे.
रेस्तरां के मैनेजर केशव कुमार को मौक़े पर ही गिरफ़्तार कर लिया गया था.
सुशील शर्मा को घटना के कई दिन बाद बंगलौर में गिरफ़्तार किया गया था. अदालत ने केशव कुमार को सात साल की सज़ा सुनाई थी.