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रविवार, 18 फ़रवरी, 2007 को 20:23 GMT तक के समाचार

समझौता एक्सप्रेस में आग

दिल्ली से अटारी जाने वाली समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में रविवार की रात पानीपत के पास आग लग गई जिसमें अब तक 58 लोगों के मरने की पुष्ठि हो गई है.

घटनास्थल पर मौजूद पानीपत के पुलिस अधीक्षक एम एस श्योराण ने बताया कि अब तक 58 शव बरामद किए जा चुके हैं.

घटना में दो दो बोगियाँ बुरी तरह से जल गई हैं. मरने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे भी हैं.

रेल मंत्री लालू प्रसाद ने बीबीसी से कुछ घंटो पहले हुई बातचीत में 34 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की थी और कहा था कि मरने वालों की संख्या और अधिक हो सकती है.

उन्होंने इस घटना के पीछे तोड़फोड़ की आशंका से इनकार नहीं किया है.

उन्होंने कहा ' घटनास्थल पर एक सूटकेस भी मिला है जिसमें ज्वलनशील पदार्थ मिले हैं और इसकी जांच की जा रही है. '

रेल मंत्री का यह भी कहना है कि आग लगने से पहले धमाकों की भी आवाज़ सुनी गई थी.

घटना स्थल पर मौजूद बीबीसी संवाददाता श्याम सुंदर ने जली हुई बोगियों को भीतर से देखने के बाद बताया है कि मरने वालों की संख्या पचास से काफी अधिक हो सकती है.

अधिकारियों ने इससे पहले कहा था कि दुर्घटना की वजह शॉर्ट सर्किट हो सकती है.

घटना हरियाणा के पानीपत से कोई दस किलोमीटर पहले सिवाह गाँव में हुई है.

पता चला है कि हताहतों में बहुत से पाकिस्तान के नागरिक हैं.

घायलों को पानीपत ज़िला अस्पताल भेजा गया है.

ज़िला प्रशासन और रेलवे के अधिकारी घटना स्थल पर हैं और फ़ायरब्रिगेड की गाड़ियाँ अभी भी आग बुझाने में लगी हुई हैं.

भयावह दृश्य

यह ट्रेन पुरानी दिल्ली स्टेशन से रात 10 बजकर 40 मिनट पर रवाना हुई थी.

रेलवे के अधिकारियों के अनुसार हादसा का पता रात 11 बजकर 55 मिनट पर चला.

अधिकारियों का कहना है कि ट्रेन में 640 यात्री सवार थे. जिनमें से 380 अनारक्षित बोगियों में थे.

जिन बोगियों में आग लगी है वे अनारक्षित ही थीं.

घटना स्थल पर मौजूद स्थानीय पत्रकार सुनील झा के अनुसार पीछे से दूसरी और तीसरी बोगियों में आग लगी है.

उनके अनुसार जिन दो बोगियों में आग लगी उनमें से कुछ ही लोग कूदकर जान बचा पाए हैं और हताहतों की संख्या बहुत अधिक है.

जिस बोगी में आग लगी थी उसके अंदर का दृश्य देखने के बाद सुनील झा ने कहा है कि बोगियों के अंदर दृश्य भयावह है और सिर्फ़ कंकाल ही कंकाल नज़र आ रहे हैं.

उनका कहना है कि जान बचाने की कोशिश में इधर उधर भागते लोग एक दूसरे के ऊपर गिर पड़े होंगे और उसी तरह कंकालों के ढेर में तब्दील हो गए हैं.

आख़िरी बोगी में तो सिर्फ़ धुँआ भरा था और उसी बोगी में सवार लोगों की चीख पुकार और कोशिशों से ट्रेन रुकी.

उनका कहना है कि घंटों के प्रयास के बाद भी बोगियों की आग पूरी तरह नहीं बुझाई जा सकी है.

समझौता एक्सप्रेस

भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौते के तहत जून, 1976 से समझौता एक्सप्रेस चलनी शुरू हुई थी.

शुरुआत में समझौता एक्सप्रेस अमृतसर और लाहौर के बीच चला करती थी.

बाद में सुरक्षा कारणों से व्यवस्था बदली गई और मई, 1994 से ये अटारी और लाहौर के बीच दो हफ्ते में एक बार चलने लगी.

दिल्ली से लाहौर के बीच बस शुरु होने के पहले दोनों देशों के आम आदमी के लिए यह आवागमन का एकमात्र साधन था.

लेकिन दिसंबर 2001 में भारतीय संसद में हमले के बाद दो जनवरी 2002 से इसे रद्द कर दिया गया था.

बाद में दोनों देशों के बीच संबंध सुधरे तो 15 जनवरी 2004 से फिर समझौता एक्सप्रेस शुरु की गई.

दिल्ली से पंजाब के अटारी स्टेशन तक की विशेष ट्रेन में दूसरे दर्जे की चार स्लीपर बोगियाँ और साधारण दर्जे की 10 बोगियाँ होती हैं.

वहीं अटारी-लाहौर समझौता एक्सप्रेस में दूसरे दर्जे की एक स्लीपर बोगी और साधारण दर्जे की सात बोगियाँ होंती हैं.