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रविवार, 18 फ़रवरी, 2007 को 11:21 GMT तक के समाचार

'राजभवन, दिल्ली का हस्तक्षेप उचित नहीं'

केंद्र सरकार के प्रमुख सहयोगी दल सीपीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सरकार का भविष्य वहाँ के लोग तय करें न कि केंद्र सरकार या राजभवन.

रविवार को पोलित ब्यूरो की बैठक की समाप्ति के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश कारत ने कहा, "उत्तर प्रदेश में हाल ही में चुनाव होने हैं. ऐसे में राज्य की सरकार के भविष्य का फैसला वहाँ की जनता पर छोड़ा जाना चाहिए."

उन्होंने कहा, "हम अनुच्छेद 356 लागू किए जाने के कतई पक्ष में नहीं है. उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार पर कोई भी फ़ैसला राजभवन या दिल्ली से नहीं लिया जाना चाहिए."

उत्तर प्रदेश में राजनीतिक उठापटक तेज़

उधर उत्तर प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी भी आक्रामक नज़र आ रही है.

लोकसभा में समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि कई बार वे इस बात को सामने रख चुके हैं कि मौजूदा राज्यपाल को उत्तर प्रदेश भेजने के पीछे बस एक ही मंशा थी कि जितनी जल्दी हो सके, वो राज्य सरकार को गिरा सकें.

उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार को बर्खास्त किया जाता है तो केंद्र सरकार भी चैन से नहीं बैठ पाएगी.

कांग्रेस पर सीधा निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह से कांग्रेस सारे सहयोगियों की मंशा को नज़रअंदाज़ करते हुए चलना चाहती है वो बहुत अलोकतांत्रिक तरीका है और देश के लिए घातक है.

विरोध

जहाँ एक ओर कांग्रेस नेताओं ने मुलायम सरकार को बर्ख़ास्त करने की मांग की तो भाजपा ने अपने दस विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की माँग रखी.

दूसरी ओर राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की अटकलों के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव स्पष्ट कर चुके हैं कि वो त्यागपत्र नहीं देंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों बहुजन समाज पार्टी के उन 13 विधायकों को अयोग्य करार दिया था जिनके समर्थन पर 2003 में मुलायम सिंह सरकार का गठन हुआ था.

इससे पहले मुख्यमंत्री मुलायम सिंह 25 जनवरी को ही सदन में अपनी सरकार का बहुमत सिद्ध कर चुके हैं.