रविवार, 18 फ़रवरी, 2007 को 11:11 GMT तक के समाचार
भारत सरकार ने कहा है कि कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए वो ऐसी बच्चियों के लिए अनाथालय शुरू करने की योजना बना रही है जिन्हें माता-पिता जन्म नहीं देना चाहते.
महिला और बाल कल्याण विभाग की मंत्री रेणूका चौधरी ने लोगों से आह्वान किया है वे अजन्मी बच्चियों को न मारें.
उन्होंने पीटीआई के बताया कि ऐसी बच्चियों को सरकार के ज़िम्मे सौंप दिया जाए.
भारत में वैसे तो जन्मपूर्व लिंग परीक्षण पर प्रतिबंध लगा हुआ है लेकिन इसके बावजूद पिछले 20 सालों में करीब एक करोड़ कन्या भ्रूण हत्याएँ हुई हैं.
भारत में इस बारे में क़ानून बनने के 12 वर्षो बाद पिछले साल पहली बार कन्या भ्रूण हत्या के मामले में जेल की सज़ा सुनाई गई थी.
हरियाणा की एक स्थानीय अदालत में एक डॉक्टर और उसके सहायक को मंगलवार को भ्रूण परीक्षण और कन्या भ्रूण की हत्या के लिए हामी भरने के आरोप में दो साल जेल और पाँच हज़ार ज़ुर्माने की सज़ा सुनाई गई थी.
इससे पहले इस क़ानून के तहत आर्थिक दंड तो दिए जा चुके हैं लेकिन जेल की सज़ा पहली बार हुई थी.
वर्ष 2001 में हुई जनगणना के अनुसार भारत में एक हज़ार पुरुषों के पीछे औसतन 927 महिलाएँ ही हैं. ये अनुपात 1991 की जनगणना में 945 था.