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सुबीर भौमिक
बीबीसी के पूर्व भारत संवाददाता

विद्रोहियों के ख़िलाफ़ भारत-बर्मा एकजुट

भारतीय अधिकारियों ने कहा है कि बर्मा पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अपने यहाँ अभियान चलाने के लिए सहमत हो गया है जिसके तहत नागालैंड, मणिपुर और असम में सक्रिय विद्रोहियों के ठिकानों पर हमले किए जाएँगे.

अधिकारियों के अनुसार बर्मा यह अभियान अपने पश्चिमी इलाक़े में सगाइंग डिवीज़न में चलाएगा जहाँ भारत के अलगाववादी चरमपंथियों ने अपने कुछ अड्डे बनाए हुए हैं.

भारत के गृह सचिव वीके दुग्गल की बर्मा यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच यह समझौता हुआ है. दुग्गल ने पाँच दिन की बर्मा यात्रा मंगलवार को शुरू की थी.

दुग्गल के साथ गए अधिकारियों ने कहा, "हमें यह ठोस आश्वासन दिया गया है कि बर्मा की सेना अनपे अतिरिक्त सैनिक सीमावर्ती इलाक़ों में तैनात कर रही है जहाँ अलगाववादी चरमपंथियों के ठिकाने बने हुए हैं."

भारत और बर्मा के सीमा अधिकारियों की यह 13वीं राष्ट्रीय स्तर की बैठक बुधवार को बर्मा की नई राजधानी नाई पी डा में संपन्न हुई.

अधिकारियों ने बताया कि बर्मा के कुछ सैनिकों को भारती सेना के विशेष अभियान और जंगल युद्ध स्कूल से ख़ास प्रशिक्षण भी दिलाया जाएगा.

भारत के गृह सचिव वीके दुग्गल ने और बर्मा के गृह उप मंत्री ब्रिगेडियर जनरल फ़ों श्वे अपने-अपने देशों के प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व किया.

भारतीय अधिकारियों ने कहा कि बर्मा से कहा गया है कि वह अपने यहाँ उन सभी अड्डों पर हमले करें जो मणिपुर और असम में सक्रिय विद्रोहियों के हैं और न सिर्फ़ नगा विद्रोहियों के ठिकानों को निशाना बनाएँ, जैसा कि वे पहले भी करते रहे हैं.

वीके दुग्गल के साथ गए एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "बर्मा के नेताओं ने कहा है कि पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय सभी विद्रोहियों के बर्मा में स्थित ठिकानों पर हमला किया जाएगा."

भारत और बर्मा ने नशीले पदार्थों की तस्करी के बारे में ख़ुफ़िया सूचनाओं के आदान-प्रदान और सीमा पर सक्रिय तस्करी गुटों के ख़िलाफ़ एकजुट मुहिम चलाने की संभावनाओं पर भी विचार किया.

भारत और बर्मा के बीच लगभग चार हज़ार किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है और ऐसा कहा जाता है कि सीमावर्ती इलाक़ों में नशीले पदार्थों की तस्करी में कम से कम पाँच गुट सक्रिय हैं.