गुरुवार, 15 फ़रवरी, 2007 को 14:13 GMT तक के समाचार
भारत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने पिछले एक वर्ष में बीस से भी अधिक विदेशी पायलटों को ठीक ढंग से अंग्रेज़ी नहीं बोल पाने के कारण भारत में उड़ान भरने की अनुमति देने से इनकार किया है.
उड्डयन सुरक्षा संबंधी एक सम्मेलन के बाद पत्रकारों से बातचीत में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के निदेशक कनु गोहाईं ने बताया कि भारत में तकरीबन 560 विदेशी पायलट उड़ान भरते हैं और पिछले एक साल में बीस से पच्चीस पायलटों को वापस भेजा गया है.
उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवा की भाषा ही अंग्रेज़ी है और इसे ठीक से जानना पायलटों के लिए ज़रुरी है.
भारत में उड़ान भरने के लाइसेंस के लिए अंग्रेजी भाषा और उड़ान संबंधी नियमों का टेस्ट लिया जाता है.
गोहाईं ने कहा कि जिन पायलटों के लाइसेंस को अनुमति नहीं दी गई है उनमें से अधिकतर मध्य एशियाई के देशों यानी कज़ाकस्तान, उज़बेकिस्तान, किर्गिज़स्तान, रुस, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान के हैं. कुछ मामले पूर्वी यूरोप और इंडोनेशिया के भी हैं.
उन्होंने बताया कि भारतीय विमान सेवाओं में घरेलू पायलटों की कमी के कारण विदेशी पायलटों की मदद ली जाती है लेकिन अब ये अधिकतर पायलट सहायक पायलटों का काम देख रहे हैं.
ज़बर्दस्त वृद्धि
गोहाईं ने भारत में विमान सेवाओं में हुई ज़बर्दस्त वृद्धि का ज़िक्र करते हुए कहा कि अब चालक दल के सदस्यों से ऐसी घटनाओं की जानकारी देने को कहा गया है जिसमें दुर्घटना होते होते बची हो.
उड़ान संबंधी सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय मानकों की जांच के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस जांच में भारत ने 189 देशों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है.
आईसीएओ ने पिछले दिनों एक प्रक्रिया शुरु की है जिसके तहत संगठन के सभी देशों को अपने सभी पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों के समय समय पर टेस्ट लेने होंगे और अंग्रेज़ी भाषा का समुचित ज्ञान होना ज़रुरी बनाया जाएगा.