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बुधवार, 14 फ़रवरी, 2007 को 18:57 GMT तक के समाचार

अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर से

कश्मीर लौटने लगे हैं 'विदेशी मेहमान'

भारतीय कश्मीर में 18 वर्ष पहले जब हिंसा का दौर शुरू हुआ तो प्रवासी पंछियों ने यहाँ आना छोड़ दिया.

मगर अब दूर-दूर से आने वाले पंछियों ने दोबारा कश्मीर घाटी की ओर रुख़ करना शुरू कर दिया है.

राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के निकट होकरसर पंछी उद्यान के वार्डन रउफ़ अहमद का कहना है कि वहाँ इन दिनों पाँच लाख से अधिक प्रवासी पंछी आए हुए हैं.

रउफ़ अहमद का अनुमान है कि इस वर्ष साढ़े आठ लाख तक प्रवासी पंछी कश्मीर घाटी में मेहमान होंगे.

अहमद का कहना है, "पिछले 18 वर्षों में इन पंछियों की तादाद बहुत कम हो गई थी लेकिन पिछले कुछ सालों से ये फिर आने लगे हैं."

अहमद का कहना है कि इसकी असली वजह क़ानून-व्यवस्था की खराब स्थिति थी, वे कहते हैं, "हमारे उद्यान में लोग खुलेआम घूमते थे, बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना रहता था जिसकी वजह से पंछी कतराने लगे."

रउफ़ अहमद का कहना है कि 1990 में तो सिर्फ़ डेढ़ लाख पंछी ही भारतीय कश्मीर आए और अगले दस वर्षों तक यही हालत रही.

पिछले कुछ वर्षों में वन विभाग ने उन इलाक़ों को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया है जहाँ ये पंछी आते हैं, अब इसका असर भी दिखने लगा है.

वे कहते हैं, "अल्लाह का शुक्र है कि हालत अब ठीक हो गई है, होकरसर की शान अब वापस लौट रही है."

यहाँ आम तौर पर रूस और चीन से पक्षी आते हैं, पिछले वर्ष तक इन पंछियों के झुंड में बारहेडेड गीस नाम का पक्षी भी देखा गया जो आम तौर पर बहुत कम नज़र आते हैं.

तरह-तरह के पंछी

कश्मीर आने वाले पक्षियों में राजहंस, गर्वाल, शॉवलेर, विगन, मलार्ड और पिनटेल प्रमुख हैं.

कश्मीर वर्षों पहले तक बत्तख़ों के शिकार की छूट थी लेकिन बाद में उस पर पाबंदी लगा दी गई.

जम्मू-कश्मीर सरकार ने होकरसर पंछी उद्यान को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी की है जिसके तहत यहाँ कश्तियों और कैफ़ेटेरिया आदि की व्यवस्था की जा रही है.

लेकिन होकरसर में तैनात किए गए इंजीनियर काज़ी रउफ़ इस बात पर चिंता प्रकट कर रहे हैं कि होकरसर में गाद (सिल्ट) भरती जा रही है जिससे उसे ख़तरा पैदा हो सकता है.

अब देखना है कि कश्मीर के अधिकारी और पर्यावरण कार्यकर्ता होकरसर को डल झील की तरह तबाह होने से बचा पाते हैं या नहीं.