मंगलवार, 06 फ़रवरी, 2007 को 09:55 GMT तक के समाचार
भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी मंगलवार से शुरू हो रही ईरान की अपनी दो दिवसीय यात्रा में द्विपक्षीय संबंधों में मजबूती के साथ गैस पाइपलाइन पर चर्चा करेंगे.
विदेश मंत्री बनने के बाद मुखर्जी की यह पहली ईरान यात्रा है.
ईरान के विदेश मंत्री मनुचेहर मोत्तकी भी पिछले साल 16-17 नवम्बर को भारत आए थे.
मुखर्जी का ईरान के राष्ट्रपति मोहम्मद अहमदीनेजाद और विदेश मंत्री मोत्तकी से भी मिलने का कार्यक्रम है.
इस दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम मसले पर भी चर्चा होगी.
इस बीच, पाकिस्तान और ईरान के गैस की कीमतों पर राजी होने से प्रस्तावित ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन योजना पर तेजी से अमल होने की उम्मीद है.
ईरान के तेल मंत्री काज़ेम वाज़िरी हमानेह ने कहा कि पाइपलाइन से मिलने वाली गैस की क़ीमत पर ईरान और पाकिस्तान के बीच सहमति बन गई है.
गैस की कीमतों पर भारत, पाकिस्तान और ईरान के अधिकारियों की हाल ही में तेहरान में बैठक हुई थी.
हमानेह ने कहा, “भारतीय अधिकारियों का कहना था कि गैस की प्रस्तावित कीमतों को तब तक अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता, जब तक कि भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहा ये मसला सुलझ नहीं जाता.”
महत्वाकांक्षी योजना
तीनों देशों के बीच लगभग सात अरब डॉलर की लागत से 2600 किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन बिछाने पर बातचीत वर्ष 1994 में शुरू हुई थी लेकिन किसी न किसी मुद्दे पर असहमति के कारण इस परियोजना के क्रियान्वयन में देरी हो रही है.
शुरुआती बातचीत के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने से इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. शांति वार्ता शुरू होने के बाद फरवरी 2004 में इस पर फिर बात शुरू हुई.
तब ईरान ने भारत और पाकिस्तान पर उचित मूल्य देने से इनकार करने का आरोप लगाया. इसके समाधान के लिए तीनों देश पिछले साल अगस्त में सलाहकार नियुक्त करने पर सहमत हुए.
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने से भारत को तेज़ी से बढ़ रही अपनी ऊर्जा ज़रूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी.