मंगलवार, 06 फ़रवरी, 2007 को 16:10 GMT तक के समाचार
अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी यानी पीडीपी के नेता और पूर्व मुख्य मंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद और उनकी बेटी महबूबा मुफ़्ती ने कहा है कि वे सुरक्षा के लिए मुहैया कराए गए पुलिसकर्मी सरकार को लौटाने का इरादा रखते हैं.
यह जानकारी उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में दी है जिसकी प्रतियाँ पत्रकारों को भी उपलब्ध कराई गई हैं.
राज्य के मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद को लिखे पत्र में पीडीपी के संरक्षक मुफ़्ती मोहम्मद सईद और पार्टी की अध्यक्षा महबूबा मुफ़्ती ने कहा है कि वे उन्हें मिली सरकारी सुरक्षा लौटा रहे हैं.
मुफ़्ती ने यह राजनीतिक पलटवार मुख्यमंत्री आज़ाद के सोमवार को विधानसभा में दिए गए उस बयान के बाद किया है, जिसमें आज़ाद ने कहा था कि अगर राज्य के राजनेता उन्हें मिल रही सुरक्षा लौटा दें तो वो तत्काल केंद्र सरकार को राज्य में तैनात सेना हटा लेने के लिए पत्र लिखेंगे.
मुफ़्ती सईद और उनकी बेटी महबूबा ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि उन्होंने ये क़दम इसलिए उठाया है ताकि मुख्यमंत्री सैन्य बल विशेषाधिकार कानून (एएफएसपीए) और सेना हटाने के मसले को केंद्र सरकार के समक्ष उठा सकें.
आज़ाद पर दबाव
सत्तारूढ़ कांग्रेस की सहयोगी पार्टी पीडीपी और विपक्षी दल नेशनल कॉन्फ्रेंस ने राज्य से सेना और एएफएसपीए हटाने की माँग की है लेकिन कांग्रेस पार्टी का मानना है कि ये क़दम उठाने के लिए अभी हालात माकूल नहीं हैं.
ग़ौरतलब है कि विशेषाधिकार क़ानून के तहत सैन्य बलों को चरमपंथी गतिविधियों के संदेह में किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार है.
मुख्यमंत्री का कहना है कि हालाँकि राज्य में क़ानून-व्यवस्था की स्थिति में तेज़ी से सुधार हुआ है लेकिन राज्य से सेना को तब तक नहीं हटाया जा सकता, जब तक कि हालात 1990 के दशक की शुरुआत जैसे नहीं हो जाते.
आज़ाद का कहना था कि सुरक्षा व्यवस्था अब भी चिंता का विषय है, क्योंकि राजनेता खुले आम नहीं घूम सकते.
उन्होंने कहा, "अगर राजनेता मुझे लिखित में दें कि उन्हें सुरक्षा की ज़रूरत नहीं है तो वह केंद्र को राज्य से सेना हटाने की सिफारिश तत्काल कर देंगे."