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मंगलवार, 06 फ़रवरी, 2007 को 11:58 GMT तक के समाचार

जल बँटवारे पर दक्षिण में राजनीति तेज़

कावेरी जल बँटवारे पर न्यायाधिकरण के फ़ैसले के विरोध में कर्नाटक की राजधानी बंगलौर और मांड्या ज़िले में किसानों और 'कन्नड़' कार्यकर्ताओं ने ज़ोरदार प्रदर्शन किए.

इस बीच, केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सैफ़ुद्दीन सोज़ ने मंगलवार को कहा कि न्यायाधिकरण के फ़ैसले के अनुरूप कावेरी नदी से संबंधित राज्यों को पानी की आपूर्ति पर निगरानी के लिए नियामक प्राधिकरण का गठन शीघ्र कर दिया जाएगा.

फ़ैसले से कर्नाटक संतुष्ट नहीं है और वहाँ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. पुलिस के मुताबिक राज्य के संवेदनशील मांड्या ज़िले में कुछ स्थानों पर किसानों के छोटे-छोटे समूहों ने सड़कें बंद कर दी हैं हालाँकि बंगलौर-मैसूर राजमार्ग पर यातायात बाधित होने की ख़बर नहीं है.

मांड्या ज़िले के पांडवपुरा, मालावल्ली और केरागोडू इलाक़ों में बंद रखा गया लेकिन कुल मिलाकर ज़िले में स्थिति शांतिपूर्ण रही.

राजधानी बंगलौर, मांड्या और मैसूर में लोगों ने प्रदर्शन किया और कुछ देर तक यातायात बाधित रहा.

स्कूल-कॉलेज बंद

वैसे पुराने अनुभव को देखते हुए सरकार ने फ़ैसला आने से पहले ही बंगलौर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम कर दिए थे.

राज्य के प्राथमिक शिक्षा मंत्री बसवराज होराती ने कहा है कि बंगलौर, मैसूर, मांड्या और कामराजनगर ज़िलों में स्कूल और कॉलेज बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं.

उल्लेखनीय है कि 17 साल पहले राज्यों के बीच कावेरी के जल बँटवारे का विवाद निपटाने के लिए न्यायाधिकरण की स्थापना की गई थी और इस न्यायाधिकरण ने सोमवार को अपना अंतिम फ़ैसला सुनाया था.

इस फ़ैसले में न्यायाधिकरण ने कर्नाटक को 270 टीएमसी (थाउजेंट मिलियन क्यूबिक फ़ीट), तमिलनाडु को 419 और पांडिचेरी को सात टीएमसी पानी दिए जाने का निर्देश दिया गया है.

इसके अलावा न्यायाधिकरण ने केरल को 30 टीएमसी पानी छोड़ने की व्यवस्था दी है.

गहमागहमी

इस बीच, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने न्यायाधिकरण के फ़ैसले के बाद की स्थिति पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई है.

कुछ 'कन्नड़' संगठनों ने ट्राइब्यूनल के इस फ़ैसले कि विरोध में आठ फरवरी को बंद का आह्वान किया है.

कर्नाटक सरकार ने कहा है कि इस फ़ैसले के विरोध में वह अदालत में अपील करेगी.

उधर, तमिलनाडु सरकार ने फ़ैसला आने के बाद ही कर्नाटक को जाने वाली सभी अंतरराज्यीय बसों को रद्द कर दिया है.

जया नाखुश

राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और एआईएडीएमके की प्रमुख जयललिता ने कहा है कि न्यायाधिकरण के फ़ैसले से तमिलनाडु के साथ 'पूरा न्याय' नहीं हुआ है.

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को और पानी हासिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाना चाहिए.

पांडिचेरी ने फ़ैसले का स्वागत किया है. राज्य के उद्योग और कृषि मंत्री वी वैतीलिंगम ने कहा, "अब सरकार और किसान फ़सल चक्र नियमित करने पर काम कर सकेंगे."