रविवार, 04 फ़रवरी, 2007 को 19:00 GMT तक के समाचार
जम्मू कश्मीर में सक्रिय चरमपंथी संगठन हिज़्बुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन का कहना है कि संघर्षविराम तभी होगा जब भारतीय प्रशासन कश्मी से अपनी सेनाएं वापस बुलाए.
ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेस के उदारवादी धड़े के नेता मीरवाइज़ उमर फारुक की संघर्षविराम की अपील के बारे में सलाहुद्दीन का कहना था कि मीरवाइज़ किसी ग़लतफ़हमी या फिर खुशफ़हमी में हैं.
बीबीसी हिंदी से एक टेलीफोन पर एक बातचीत में उनका कहना था ' संघर्षविराम के बारे में हमारे कटु अनुभव हैं. जब तक भारतीय सेना कश्मीर से नहीं हटती तब तक हम संघर्षविराम के बारे में सोच भी नहीं सकते.'
उन्होंने कहा ' भारतीय सेना के बकौल कश्मीर में 15 से 17 सौ चरमपंथी हैं. हम कहते हैं कि भारतीय सैनिकों की संख्या साढे सात लाख है. वो अपनी संख्या 17 हज़ार कर लें तो हम कुछ करेंगे.'
यह पूछे जाने पर कि क्या वो संघर्षविराम के बिल्कुल नहीं हैं तो उनका कहना था कि शुरुआत भारतीय पक्ष से हो तो उन्हें भी संघर्षविराम करने में कोई दिक्कत नहीं है.
भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे पर आपसी समझ बनने और बेहतर माहौल के बारे में उनका कहना था कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कश्मीर में कुछ स्थानों पर से सेना हटाने का प्रस्ताव दिया था और उसे भी भारतीय पक्ष ने स्वीकार नहीं किया है.
मीरवायज़ के बयान के बारे में उनका कहना था कि मीरवायज़ को ज़मीनी हालात का अंदाज़ा नहीं है और वो किसी ग़लतफ़हमी में ऐसी अपील कर रहे हैं.