रविवार, 04 फ़रवरी, 2007 को 13:03 GMT तक के समाचार
अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर में हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के उदारवादी धड़े के नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने चरमपंथियों से संघर्षविराम की अपील की है.
उन्होंने मांग की कि भारत सरकार की ओर से कश्मीर में सैनिकों को हटाने के लिए एक समयसीमा तक संघर्षविराम होना चाहिए.
ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस में मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ का गुट भारत और पाकिस्तान के साथ अलग-अलग बातचीत कर रहा है.
पाकिस्तान की नौ दिनों की यात्रा के बाद श्रीनगर में अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने कहा कि कश्मीर एक जटिल मुद्दा है और इसका हल चरणबद्ध तरीक़े से ही किया जा सकता है.
चरणबद्ध तरीक़ा
उन्होंने कहा कि इसका पहला चरण कश्मीर से सैनिकों को हटाना है. उन्होंने कहा कि चरमपंथी गुटों को भारत सरकार के इस तर्क का उत्तर देना चाहिए जिसमें वह हमेशा कहती रहती है कि जब तक कश्मीर में हिंसा जारी रहेगी वहाँ से सैनिकों को नहीं हटाया जा सकता.
मीरवाइज़ ने कहा, "मेरा मानना है कि कश्मीरी गुटों को एक समयसीमा के लिए संघर्षविराम करना चाहिए और इस दौरान भारत को इसका जवाब देने को कहना चाहिए. हम इस मुद्दे पर एक सहमति तैयार करना चाहते हैं ताकि भारत के पास ये तर्क ना रहे कि कश्मीर की स्थिति देखते हुए वह वहाँ से सैनिकों को नहीं हटा सकता."
उन्होंने उम्मीद जताई कि चरमपंथी नेता इस मुद्दे को समझेंगे और सहयोग करेंगे. मीरवाइज़ ने कहा कि भारत को भी एकतरफ़ा संघर्षविराम घोषित करना चाहिए.
उन्होंने इस पर भी उम्मीद जताई कि अगले तीन महीने के अंदर कश्मीर पर एक बड़ा क़दम आगे बढ़ाया जा सकता है.
मीरवाइज़ ने कहा कि इसका कारण ये है कि भारत और पाकिस्तान ने पहली बार एक-दूसरे को प्रस्ताव भेजे हैं.
उम्मीद
उन्होंने कहा कि वे इस बात को लेकर भी आशान्वित हैं कि भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पाकिस्तान जाएँगे और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ भी भारत आएँगे.
मीरवाइज़ ने कहा कि इन दोनों नेताओं की यात्रा से पहले इस दिशा में और भी काम होंगे. उन्होंने कहा, "दरअसल मुझसे कहा गया है कि कुछ प्रगति हुई है और सही समय पर हम उसे सार्वजनिक करेंगे. यह निश्चित है कि दोनों देश इस पर सहमत हैं कि गतिरोध ख़त्म करने की आवश्यकता है."
मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने फ़र्ज़ी मुठभेड़ों की निष्पक्ष जाँच की भी मांग की. उन्होंने कहा कि पुलिस ही पुलिसवालों के ख़िलाफ़ जाँच करे, यह सिर्फ़ दिखावा है.
उन्होंने पुलिस और सुरक्षा बलों को दिए गए विशेषाधिकारों को वापस लेने की भी मांग की.