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रविवार, 04 फ़रवरी, 2007 को 10:28 GMT तक के समाचार

बंगलोर में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त

कावेरी जल विवाद प्राधिकरण के निर्णय पर किसी भी संभावित हिंसा को रोकने के लिए बंगलोर में 16 हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं.

तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच करीब सौ वर्षों से चल रहे इस विवाद पर सोमवार को दिल्ली स्थित प्राधिकरण का निर्णय आना है.

1991 में इस प्राधिकरण के एक अंतरिम निर्णय के बाद बंगलोर में तमिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी थी जिसमें 18 से भी अधिक लोग मारे गए थे और कई लोग घायल हुए थे.

बंगलोर के पुलिस आयुक्त अच्युत राव ने बीबीसी को बताया कि 1991 के दंगों की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए सुरक्षा के कड़े उपाय किए गए हैं.

उन्होंने कहा कि हाल में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच भड़के सांप्रदायिक दंगों से बंगलोर अभी उबरा ही है और पुलिस कोई मौका नहीं देना चाहती.

राव ने बताया कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की अध्यक्षता में हुई एक सर्वदलीय बैठक में निर्णय का कर्नाटक के खिलाफ जाने की स्थिति में भी शांति बनाए रखने का आह्वान किया गया है.

कर्नाटक तमिल्स फेडरेशन ने राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और स्थानीय अधिकारियों को पत्र लिखकर बंगलोर में रह रहे तमिलों को सुरक्षा प्रदान किए जाने की मांग की है.

इससे पहले कर्नाटक द्वारा तमिलनाडु को प्रति वर्ष 205 अरब क्यूसेक पानी छोड़े जाने के अंतरिम निर्णय के बाद बंगलोर शहर में तमिल विरोधी दंगे भड़क गए थे.

तमिलनाडु सीमा से लगे कर्नाटक के जिलों मंड्या, मैसूर और चमाराजनगर में भी तमिलों पर हमले हुए थे.

दोनों राज्यों के बीच कावेरी जल विवाद एक संवेदनशील मुद्दा रहा है जिसको लेकर प्रायः इस क्षेत्र में हिंसा भड़क जाती है.

वर्ष 2002 में तमिलनाडु को पानी छोड़े जाने के निर्णय के विरोध में एक किसान ने नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली थी जिससे इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था.