शनिवार, 03 फ़रवरी, 2007 को 10:49 GMT तक के समाचार
अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर में पुलिस के हाथों कथित फर्जी मुठभेड़ में कुछ आम लोगों को मारने के मामले में एक पुलिस अधीक्षक और एक पुलिस उप अधीक्षक को गिरफ़्तार कर लिया गया है.
इस बीच शनिवार को राजधानी श्रीनगर से उत्तर में अजस शहर में हज़ारों लोगों ने प्रदर्शन किया और भारत विरोधी नारे लगाए.
अजस में शनिवार को एक और शव क़ब्र से निकाला जा गया और वो शव मौलवी शौक़त का बताया गया है.
उधर पुलिस ने कथित फर्जी मुठभेड़ में मारे गए एक अन्य व्यक्ति ग़ुलाम नबी वानी का शव क़ब्र से जाँच के लिए निकाला. इसे मिलाकर पुलिस जाँच दल पिछले तीन दिन में अब तक तीन शव क़ब्रों से निकाल चुका है.
ग़ुलाम नबी वानी कथित फर्जी मुठभेड़ में 13 मार्च 2006 को मारा गया था. उस समय पुलिस ने दावा किया था कि उसने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर का एक चरमपंथी जुल्फ़ेक़ार अहमद मठभेड़ में मार दिया है.
पुलिस महानिरीक्षक एसएम सहाय ने बीबीसी को बताया कि फर्जी मुठभेड़ के मामले में पुलिस अधीक्षक हंसराज परिहार और उनके नायब बहादुर राम को गिरफ़्तार किया गया है.
इसके साथ ही इस मामले में गिरफ़्तार पुलिस अधिकारियों की संख्या चार हो गई है. दो अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है.
राज्य की विशेष पुलिस टीम इस मामले की जाँच कर रही है. जाँच टीम ने कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मारे गए दो लोगों के शव क़ब्र से निकाले हैं.
शुक्रवार को गांदरबल स्थित क़ब्रिस्तान से एक शव निकाला गया था. कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मारा गया एक व्यक्ति पेशे से बढ़ई था जिसने सरकारी नौकरी पाने के लिए एक पुलिसकर्मी को 80 हज़ार रुपए दिए थे.
पुलिस ने कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ों के बाद दोनों लोगों की शिनाख्त विदेशी चरमपंथियों के रूप में की थी.
गुरुवार और शुक्रवार को सुरक्षा बल जब इन शवों को क़ब्र से निकाल रहे थे तो इलाक़े के लोगों ने प्रदर्शन किया और उन्होंने दोषी अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग की.
पुलिस को उन्हें तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस का इस्तेमाल किया.
ग़ौरतलब है कि चरमपंथ विरोधी विशेष सुरक्षाबल पर पहले भी मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगे हैं.