शुक्रवार, 02 फ़रवरी, 2007 को 14:24 GMT तक के समाचार
अफ़ग़ानिस्तान में सक्रिय तालेबान ने दक्षिणी प्रांत हेलमंद के उस गाँव पर फिर से क़ब्ज़ा कर लिया है जिसे ब्रिटिश सैनिकों ने हाल ही में स्थानीय लोगों को सौंपा था.
ब्रिटिश सैनिकों ने हेलमंद प्रांत के मूसा क़ला गाँव में स्थानीय क़बायली नेताओं के साथ शांति समझौता किया था जिसके बाद उस गाँव का नियंत्रण उन नेताओं को सौंपकर ब्रिटिश सैनिक वहाँ से हट गए थे.
अमरीकी कमांडरों और कुछ राजनयिकों ने इस शांति समझौते की आलोचना की थी और कहा था कि यह समझौता दरअसल क़बायली नेताओं के साथ नहीं बल्कि तालेबान नेताओं के साथ ही किया गया था और तालेबान को हराने का यह सही तरीक़ा नहीं है.
उस गाँव के कुछ ग्रामीणों ने कहा है कि वे अपना गाँव छोड़कर किसी दूसरे स्थान पर जा रहे हैं क्योंकि वहाँ तालेबान की मौजूदगी पर नैटो सैनिक बमबारी कर सकते हैं.
मूसा क़ला शांति समझौते को रणनीति में महत्वपूर्ण और विवादास्पद बदलाव के रूप में देखा गया था.
ब्रितानी सैनिकों का कहना है कि जिन क़बायली नेताओं के साथ यह समझौता हुआ था उन्होंने कहा था कि वे तालेबान लड़ाकों को उस शहर में नहीं आने देंगे और अपनी ख़ुद की पुलिस यूनिट के साथ सुरक्षा का इंतज़ाम करेंगे.
अफ़ग़ानिस्तान में ब्रिटिश सेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि उस शांति समझौते के बाद मूसा क़ला शहर में 142 दिन तक शांति रही है लेकिन अब ऐसा लगता है कि वह समझौता समाप्त हो गया है और इसलिए शांति भी भंग हो गई है.
हेलमंद प्रांत के गवर्नर और स्थानीय लोगों ने बीबीसी को बताया है कि तालेबान रात के दौरान मूसा क़ला में घुस आए और ऐसे कुछ बुज़ुर्गों को पकड़ लिया जिन्होंने तालेबान का विरोध किया था, तालेबान ने कुछ सरकारी इमारतों को भी नुक़सान पहुँचाया है.
राजधानी काबुल में बीबीसी संवाददाता एलेस्टेयर लीथहैड का कहना है कि मूसा क़ला गाँव पर तालेबान का नियंत्रण होना दरअसल हेलमंद प्रांत में शांति बहाल करने की रणनीति को एक बड़ा झटका है.
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब नैटो सेनाओं की कमान कुछ ही दिन में ब्रिटिश सैनिकों के हाथों से निकलकर एक अमरीकी जनरल को सौंपी जाएगी.