शुक्रवार, 02 फ़रवरी, 2007 को 10:48 GMT तक के समाचार
नेपाल सरकार ने जातीय हिंसा से प्रभावित तराई क्षेत्र में मधेशी प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए तीन सदस्यों वाला एक दल बनाने की घोषणा की है.
हालाँकि मधेशी समुदाय ने कहा कि पुलिस कार्रवाई बंद होने की सूरत में ही वह अपना प्रदर्शन समाप्त करेंगे.
प्रदर्शनकारी क्षेत्रीय स्वायत्तता दिए जाने की माँग कर रहे हैं. पूर्व माओवादी विद्रोहियों ने भी मधेशी समुदाय की माँगों के प्रति सहानुभूति जताई है.
भारतीय सीमा से सटे नेपाल के इस हिस्से में पिछले कुछ दिनों से चल रहे जातीय संघर्ष में कम से कम 13 लोग मारे गए हैं.
सुलह
नेपाल सरकार ने मधेशी समुदाय से बातचीत के लिए कृषि मंत्री महंत ठाकुर के नेतृत्व में तीन सदस्यों वाले एक दल का गठन किया है.
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पर्यटन मंत्री प्रदीप ज्ञानवली ने संवाददाताओं को बताया, "ये दल तराई के लोगों की शिकायतें सुनेगा और इस मसले के निपटारे के लिए कई विकल्पों पर बातचीत करेगा."
प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला ने बुधवार को नेपाल को संघीय स्वरूप देने की बात कही थी और कहा था कि इस वर्ष चुनी जाने वाली संविधान सभा में मधेशी समुदाय का प्रतिनिधित्व बढाया जाएगा.
इससे पूर्व, मधेशी पीपुल्स राइट फ़ोरम के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई रोकने की माँग की थी.
उन्होंने अधिकारियों को लोगों की हत्या का ज़िम्मेदार बताते हुए कहा था कि बातचीत से पहले दोषी अधिकारियों को दंडित किया जाना चाहिए.
यादव ने कहा, "प्रधानमंत्री के संघीय दर्जे के प्रस्ताव से हम संतुष्ट नहीं हैं. जब तक मधेशी लोगों की माँगे पूरी नहीं हो जाती, हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा."
शिकायत
मधेशी समुदाय अपने लिए संसद में अधिक प्रतिनिधित्व की माँग कर रहा है. तराई के इस इलाक़े में रहने वाले लोगों में एक बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनके पुरखे किसी ज़माने में भारत से नेपाल में बसने आए थे.
इन लोगों को लंबे समय से शिकायत रही हैं कि नेपाल सरकार ने उनकी अनदेखी की है और उनकी समस्याओं और विकास पर ध्यान नहीं दिया गया है.
बहुत से लोगों को नेपाली राष्ट्रीयता देने से भी इनकार किया गया है हालाँकि वे लोग वहाँ दशकों से रह रहे हैं.
माओवादी नेता प्रचंड ने कहा है कि हालाँकि वह इस जातीय हिंसा का समर्थन नहीं करते, लेकिन मधेशियों की माँगें 'जायज़' हैं और इन पर अवश्य अमल होना चाहिए.