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सोमवार, 29 जनवरी, 2007 को 10:08 GMT तक के समाचार

परमाणु हथियार भारत की मजबूरी: सोनिया

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र होना भारत की रणनीतिक मजबूरी है लेकिन परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में वह अपनी मुहिम को जारी रखेगा.

महात्मा गांधी के अहिंसक आंदोलन सत्याग्रह की सौवीं वर्षगांठ मनाने के लिए काँग्रेस की ओर से आयोजित सम्मेलन का उदघाटन करते हुए सोनिया गांधी ने कहा, "महात्मा गांधी की सोच को अप्रासंगिक कहकर खारिज देना भारी भूल होगी."

उन्होंने कहा, ''यह सही है कि भारत के पास परमाणु हथियार हैं. लेकिन यह एक रणनीति मजबूरी है क्योंकि दुनिया में परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रयास विफल रहे हैं."

महात्मा गांधी के शब्दों को दोहराते हुए सोनिया ने कहा, "हिंसा को जवाबी हिंसा से ख़त्म नहीं किया जा सकता."

सोनिया ने कहा कि आज की दुनिया में परमाणु हथियार एक क्रूर सच है. इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि आज परमाणु हथियार संपन्न देशों के पास इतने हथियार हैं कि पूरी मानवता को कई बार ख़त्म किया जा सकता है.

'गांधी से लें प्रेरणा'

सोनिया ने कहा कि यह सवाल पूछना स्वाभाविक है कि क्या महात्मा गांधी के तरीक़े आज भी सफल और कारगर सिद्ध हो सकते हैं.

यह भी पूछा जा सकता है कि क्या महात्मा गांधी के बताए हुए रास्ते पर चलकर आतंकवाद जैसी समस्या से निपटा जा सकता है.

सोनिया ने कहा कि अब हमारे सामने यह चुनौती है कि हम महात्मा गांधी से के तरीक़े से रचनात्मक प्रेरणा लेकर सत्याग्रह का ऐसा तरीका अपनाएँ जो आज के समय के अनुरूप हो.

उन्होंने कहा कि यह दुखद सत्य है कि कई बार अपनी बात पहुँचाने के लिए हिंसा का सहारा लेना पड़ता है लेकिन इससे किसी समस्या का हल नहीं निकलता बल्कि वेदना और यातना बढ़ती है.

दो दिन के इस सम्मेलन में 90 देशों और 122 संगठनों के प्रतिनिधि गांधी की विचारधारा और प्रासंगिकता पर अपने विचार रखेंगे.

इनमें नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त आर्चबिशप डेसमंड टूटू, मोहम्मद यूनुस, लेक वालेसा, दक्षिण अफ़्रीका के स्वतंत्रता सेनानी अहमद कथरादा, लॉर्ड भिखू पारिख और प्रोफ़ेसर सीके प्रहलाद भी शामिल हैं.