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गुरुवार, 25 जनवरी, 2007 को 13:03 GMT तक के समाचार

दक्षिणी नेपाल में हिंसा बढ़ी

नेपाल के दक्षिणी इलाक़े में तनाव और हिंसा बढ़ती नज़र आ रही है और गुरूवार को वहाँ आठ लोग ज़ख़्मी हो गए.

दक्षिणी नेपाल में बड़ी संख्या में रहने वाले मधेशी समुदाय के लोग ज़्यादा स्वायत्तता और संसद में ज़्यादा प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं.

उनकी यह भी मांग है कि मैदानी इलाक़ों में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन पहाड़ी लोगों को हटाया जाए.

मधेशी लोगों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का आहवान किया है.

गुरूवार को बिराटनगर और जनकपुर में हिंसा होने की ख़बरें मिलीं हैं.

यह समस्या तब शुरू हुई जब माओवादियों ने नई सरकार में शामिल होने का न्यौता दिया था और उसके बाद विद्रोहियों का ख़तरा कम हो गया था.

राजधानी काठमाँडू में बीबीसी संवाददाता सुरेंद्र फुयाल का कहना है कि मैदानी इलाक़ों में रहने वाले मधेशी लोगों में पहाड़ी लोगों का दबदबा होने पर बहुत असंतोष है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्रोधित मधेशी लोग भाले, फावड़े और डंडे लेकर घूम रहे हैं और उन्होंने भारत की तरफ़ जाने वाले कई वाहनों को भी नुक़सान पहुँचाया है.

एक चश्मदीद गवाह तान्का खनाल ने कहा कि सिर्फ़ बिराटनगर में ही लगभग 35 लोग घायल हुए.

सुनसारी ज़िले में भी दस से ज़्यादा लोगों के घायल होने की ख़बर हैं. वहाँ से ख़बरें हैं कि मधेशी कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सरकार के अधिकारियों के ले जा रहे एक वाहन को नुक़सान पहुँचाया.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि गुरूवार को हुई हिंसा में जो लोग घायल हुए उनमें से ज़्यादातर पहाड़ी मूल के थे.

लहान क़स्बे में गत सप्ताह गुरूवार को हिंसा भड़कने के बाद कर्फ़्यू लगा दिया गया था. वहाँ हालात कुछ सामान्य होने की ख़बरें हैं.

नेपाल के मैदानी इलाक़े को तराई कहा जाता है जहाँ मधेशी समुदाय के लोग ज़्यादा संख्या में रहते हैं जिनमें हिंदू, मुस्लिम और बौद्ध हैं. ये लोग हिंदी और नेपाली भाषाएँ बोलते हैं.

नेपाली की कुल आबादी लगभग दो करोड़ 70 लाख है और उसमें से मधेशियों की संख्या 33 से 45 प्रतिशत है लेकिन सरकार और सेना में उनका प्रतिनिधित्व बहुत कम है.

सरकार और सेना में पहाड़ी लोगों की ज़्यादा संख्या है.

नेपाल के गृहमंत्री कृष्णा प्रसाद सितौला ने तराई गुट से नए सिरे से बातचीत करने का न्यौता दिया है और यह बातचीत जून में प्रस्तावित संविधान सभा के चुनाव से पहले करने की पेशकश की है.

लेकिन मधेशी जनाधिकार फ़ोरम के चेयरमैन उपेंद्र यादव ने बीबीसी को बताया कि बातचीत के लिए उन्हें औपचारिक न्यौता चाहिए और एक उचित वातावरण भी.