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गुरुवार, 25 जनवरी, 2007 को 14:34 GMT तक के समाचार

भारत-रूस संयुक्त बयान की ख़ास बातें

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद संयुक्त बयान जारी किया गया है.

प्रस्तुत हैं इस संयुक्त बयान के मुख्य बिंदु:

1. रूस भारत के साथ तमिनाडु के कुडांकुलाम में चार अतिरिक्त परमाणु बिजली घर लगाने में सहयोग करेगा और देश में अन्य जगहों पर इनके निर्माण में सहयोग करेगा.

2. रूस के ग्लोबल नेविगेशनल सेटेलाइट सिस्टम यानि उपग्रह व्यवस्था से भारत को भी सिग्नल मिल पाएँगे.

3.भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और रूस की फ्रेडेरल स्पेस एजेंसी संयुक्त उपग्रह परियोजना 'यूथसैट' में सहयोग करेंगे.

4. भारत और रूस अपने आर्थिक सहयोग और व्यापार को बढ़ाएँगे और इसे वर्ष 2010 तक दस अरब डॉलर तक ले जाएँगे.

5. भारत-रूस व्यापार और पूँजी निवेश फ़ोरम की पहली बैठक भारत में फ़रवरी में होगी जिसमें दोनो देशों के उद्योगपति और व्यवसायी भाग लेंगे.

6. तेल और गेस के क्षेत्र में भारत और रूस केवल आपस में ही नहीं बल्कि तीसरे देशों में भी इस क्षेत्र में सहयोग करेंगे.

7. रक्षा क्षेत्र में ख़रीदार-विक्रेता के संबंध से आगे बढ़ते हुए दोनो देश शोध, विकास, निर्माण, बिक्री और संयुक्त अभ्यास में सहयोग बढ़ाएँगे. ब्रह्मोस मिसाइल के संयुक्त निर्माण के साथ-साथ दोनो पक्ष संयुक्त तौर पर बहु-उपयोगी यातायात विमान भी बनाएँगे.

8.रूस ने भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता दिए जाने पर अपना समर्थन दोहराया.

9. दोनो देशों ने 'आतंकवाद' की कड़ी निंदा की और कहा कि चाहे किसी ने, किसी भी कारण से ऐसी वारदात की हो, उसे सही नहीं ठहराया जा सकता.

10. ईरान पर दोनो देशों का मानना था कि इरान के परमाणु मुद्दे का हल राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयासों से ही निकाला जाना चाहिए. इस बारे में ईरान को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ सक्रिय और पारदर्शी सहयोग करना चाहिए.

11. दोनो पक्ष सहमत थे कि कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त रखना चाहिए और इस समस्या का हल छह पार्टियों की बातचीत से ही खोजा जाना चाहिए.

12. दोनो देशों ने प्रतिबद्धता जताई कि अरब-इसराइली संकट का समग्र, स्थायी न्यायसंगत हल अंतरराष्ट्रीय क़ानून, संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों, मैड्रिड सिद्धांतों और रोड मैप को ध्यान में रखते हुए होना चाहिए.

13. इराक़ पर दोनो देशों का कहना था कि वहाँ शांति, स्थिरता और प्रगति धार्मिक और सामुदायिक गुटों और राजनीतिक ताकतों के बीच वार्ता के बाद ही संभव है और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को प्रयास करने चाहिए.

14. रूस और भारत ने चीन-रूस-भारत के बीच त्रिपक्षीय सहयोग को बढ़ाने का आहवान भी किया.