मंगलवार, 23 जनवरी, 2007 को 17:09 GMT तक के समाचार
वंदना
बीबीसी संवाददाता, लंदन
अफ़ग़ान समुदाय के कुछ लोगों ने ब्रिटेन की राजधानी लंदन में बॉलीवुड फ़िल्म काबुल एक्सप्रेस के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया.
इन लोगों का आरोप है कि फ़िल्म काबुल एक्सप्रेस में अफ़ग़ानिस्तान के हज़ारा कबीले के लोगों को जिस तरह से पेश किया गया है वो ग़ैर ज़िम्मेदाराना और नस्लवादी है.
काबुल एक्सप्रेस का निर्देशन कबीर खान ने किया है और ये यशराज फ़िल्मस के बैनर तले बनी है.
लंदन में यश राज फ़िल्मस के कार्यालय ने इन आरोपों के बारे में कहा कि है कि वे इस विवाद के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते.
प्रदर्शनकारियों ने फ़िल्म से जुड़े लोगों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करने की बात उठाई है.
अफ़ग़ान दोस्ती सोसाइटी के प्रमुख हुमायूँ ताच का कहना था, " ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि काबुल एक्सप्रेस में हज़ारा समुदाय का ग़लत तरीके से चित्रण किया गया. हमारी माँग है कि बॉलीवुड इसके लिए माफ़ी माँगी. हम फ़िल्म से जुड़े लोगों के ख़िलाफ़ क़ानूनी क़दम भी उठा सकते हैं."
'प्रदर्शन भारत के ख़िलाफ़ नहीं'
प्रदर्शन करने आए आगा मरज़ूक अली का कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान के लिए सबसे ज़्यादा कुर्बानी हज़ारा कबीले ने ही दी है और बॉलीवुड ने बगैर किसी शोध के कबीले को ग़लत ढंग से पेश किया.
जब सवाल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उठा तो प्रदर्शन में हिस्सा लेने आई खदिजा ने कहा कि वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करती हैं लेकिन ये भी चाहती हैं कि उनके समुदाय के सम्मान को ठेस न पहुँचे.
फ़िल्म की कहानी दो भारतीय पत्रकारों, एक अमरीकी और पाकिस्तानी पत्रकार और एक अफ़ग़ान गाइड के बीच रिश्ते के इर्द गिर्द घूमती है और और इसकी शूटिंग अफ़ग़ानिस्तान में हुई है.
जॉन इब्राहम और अरशद वारसी ने फ़िल्म में मुख्य भूमिका निभाई है.
फ़िल्म ने भारत में आम तौर पर अच्छा प्रदर्शन किया है.
भारतीय उच्चायोग के बाहर जमा हुए प्रदर्शनकारियों ने अपनी नाराज़गी तो ज़ाहिर की लेकिन साथ ही ये स्पष्ट किया कि ये भारत या भारतीय सरकार का विरोध नहीं है.
प्रदर्शन में हिस्सा लेने आए इस्मतउल्ला ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से भविष्य मे दोनों देशों के रिश्तों पर असर पड़ सकता है. भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच बरसों से प्रगाढ़ सांस्कृतिक संबंध रहे हैं.