शुक्रवार, 19 जनवरी, 2007 को 18:16 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, इलाहाबाद से
इलाहाबाद में अर्धकुंभ के अवसर पर मौनी अमावस्या के दिन क़रीब दो करोड़ लोगों ने संगम में स्नान किया.
शुक्रवार को मौनी अमावस्या के अवसर पर इस बार के अर्धकुंभ का दूसरा शाही स्नान हुआ जिसमें हिस्सा लेने के लिए देश और दुनियाभर से लोग इलाहाबाद पहुँचे.
मौनी अमावस्या के लिए शाही स्नान सुबह से ही शुरू हो गया था और यह क्रम दोपहर बाद चार बजे तक चलता रहा. शाही स्नान के क्रम में आखिरी अखाड़े की बारी क़रीब चार बजे ही आई.
इस मेले के मुख्य स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर, प्रयाग में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी संगम पर हिन्दू तीर्थ यात्रियों और नगा साधुओं का स्नान अभी भी जारी है.
मेले के मुख्य आयोजक आरएन त्रिपाठी ने बताया कि दोपहर बाद तक लगभग दो करोड़ लोग स्नान कर चुके थे और स्नान का यह सिलसिला देर रात तक जारी रहने की उम्मीद है.
बीबीसी संवाददाता ने बताया कि भीड़ के कारण एक तय मात्रा में ही लोगों को घाटों तक जाने दिया जा रहा है और लाखों की तादाद में लोग अभी भी कुंभ तक पहुँचने की प्रतीक्षा में हैं.
मौनी अमावस्या का स्नान
प्रशासन ने बताया कि इस दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई है. माना जा रहा है कि मौत का कारण हृदयगति का रुकना है.
वैसे तो तीर्थयात्री आधी रात के बाद से ही स्नान प्रारम्भ कर चुके थे लेकिन मेले में आकर्षण का केंद्र बिंदु नगा साधुओं का स्नान सूर्योदय से कुछ पहले करीब सवा छ: बजे शुरु हुआ.
सबसे पहले महानिर्वाणी अखाड़े का जुलूस बैंड बाजे और झण्डों के साथ आया जिसमें प्रमुख संत और महामंडलेश्वर ट्रैक्टरों पर विशेष रुप से बनाए रथों पर सवार थे और उनके सिर के ऊपर छत्र तथा धर्म ध्वज लगे थे.
जुलूस के साथ अखाड़ों के देशी और विदेशी भक्त भी आए और क़रीब दो किलोमीटर लंबे रास्ते पर बल्लियों के पीछे खड़े लोग श्रद्धा से माथा झुकाकर उन्हें प्रणाम कर रहे थे. नंग-धड़ंग नगा साधु हर-हर महादेव के नारे लगाते हुए, दौड़ते हुए गंगाजी में स्नान के लिए कूद पड़े.
साधुओं का व्यवहार बदला
घाट के सामने अरैल की तरफ़ दाहिने किले की तरफ़ और बाँए झूसी की तरफ़ लाखों की तादाद में लोग गंगा स्नान के साथ-साथ नगा साधुओं का शाही स्नान देख रहे थे.
दुनिया भर के पत्रकार और फोटोग्राफर लेखक और साहित्यकार इस दृश्य को कवर करने के लिए मौजूद हैं. नगा साधुओं के व्यवहार में यह बड़ा परिवर्तन दिखाई दिया कि अब वे कैमरा देखकर गुस्सा नहीं करते बल्कि बड़े प्रेम से फ़ोटो खिचवाते हैं और तरह-तरह के करतब दिखाते हैं.
महानिर्वाणी के बाद निरंजनी और फिर जूना अखाड़े का जुलूस स्नान के लिए सुबह क़रीब आठ बजे पहुँचा जिसमें महिला नगा साधु भी थीं.
जूना अखाड़े के सचिव विद्यानन्द सरस्वती का कहना था कि प्रशासन ने घाटों पर स्नान और यातायात नियंत्रण की अच्छी व्यवस्था की है.
इस मौक़े पर आए हुए तीर्थ यात्रियों से बात हुई. उनका मानना था कि अर्धकुंभ में ग्रहों और नक्षत्रों का ऐसा योग बनता है कि गंगा का जल अमृत तुल्य हो जाता है और स्नान करने से मन और शरीर के सारे पाप धुल जाते हैं. उनका यह भी विश्वास है कि गंगा में 'स्नान से जन्म-मृत्यु के झंझट से मुक्ति यानि मोक्ष मिलता है.'
ईसाई धर्मावलंबी भी आए
मेले में बड़ी तादाद में अमरीका, ब्रिटेन, जापान, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया से ईसाई धर्मावलंबी भी आए हैं जिनमें से अनेक हिन्दू धर्म में दीक्षा लेकर अपना नाम भी बदल चुके हैं. इन लोगों का भी कहना था कि गंगा स्नान में कुछ ऐसा जादू और चमत्कार है जिससे आध्यात्मिक आनंद मिलता है.
जब मैंने इन लोगों से गंगा के प्रदूषण की चर्चा की तो उन लोगों का कहना था कि नदी को साफ़ करने के लिए और प्रयास की ज़रुरत तो है लेकिन स्नान के समय प्रदूषण ख़त्म हो जाता है और गंगा जल का चमत्कारी प्रभाव ही दिमाग पर हावी रहता है.
शाही स्नान तीसरे पहर तक चलेगा जबकि आम यात्रियों का स्नान देर शाम तक चलता रहेगा.
मेले के मुख्य प्रबंधक और इलाहाबाद के कमिश्नर रवीन्द्रनाथ त्रिपाठी लाउडस्पीकर पर बार-बार ऐलान करते दिखे - "लोग स्नान करके तुरंत घाट खाली कर दें और आज पूजा-पाठ न करें."
जजों की गाड़ियाँ
ज़ाहिर है एक सीमित जगह पर करोंड़ो लोगों का स्नान सकुशल संपन्न कराना एक चुनौती और जोख़िम भरा काम है लेकिन मेला अधिकारी का कहना है कि इसका श्रेय किसी व्यक्ति या अफ़सर को देना उचित नहीं. उनके अनुसार दैवीय शक्तियां ही मेला संपन्न कराती हैं.
मेले में एक खटकने वाली बात यह ज़रुर रही की जहाँ लाखों तीर्थयात्री और ड्यूटी पर लगे पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों के जवान मेले पर मीलों पैदल चल रहे थे, वहीं जजों की गाड़ियाँ लालबत्ती लगाए, भीड़ को चीरती हुई आ-जा रही थीं.
ये सब इसके बावजूद कि दुर्घटना के भय से वीआईपी लोगों की मोटर गाड़ियों का आवागमन मेलाक्षेत्र में प्रतिबंधित रहता है.