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गुरुवार, 18 जनवरी, 2007 को 21:59 GMT तक के समाचार

श्याम सुंदर
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

'दंतेवाड़ा कैंपों में महिलाओं का शोषण'

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले का दौरा करने के बाद महिला कार्यकर्त्ताओं की टीम का मानना है कि सलवा जुडूम के कारण दंतेवाड़ा में समाज का सैन्यीकरण समस्या का हल नहीं है.

इस टीम के अनुसार राहत कैम्पों में रह रहीं आदिवासी महिलाओं ने उन्हें बताया कि हजारों ग्रामीण इन कैम्पों में रह रहे हैं और उनके घर और खेत सब छूट गए हैं.

इन आदिवासी महिलाओं और अन्य लोगों को सरकार की तरफ से रोज़गार उपलब्ध नहीं कराया जाता और उन्हें आस-पास के गाँवों में बहुत कम पैसों पर मज़दूरी करनी पड़ती है.

इस टीम की सबसे बड़ी चिंता यह है कि इन महिलाओं का बड़े स्तर पर यौन शोषण होता है.

महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर बनी समिति की संयोजक शोमा सेन कहती हैं, “हाल
में नक्सलवादी आंदोलन का सामना करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की पहल पर शुरु हुए सलवा जुडूम अभियान के बाद से वहाँ हिंसक संघर्ष बढ़े हैं.”

इसके चलते बहुत बड़ी संख्या में लोग विस्थापित भी हुए हैं.

राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस तथ्य पर सहमति प्रकट की है और राज्य सरकार को कुछ सिफारिशें भेजी है.

राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य मालिनी भट्टाचार्य ने कहा, “ हमने देखा है कि सलवा जुडूम के बाद हिंसा थमने की बजाए बढ़ी है. हमारा मानना है कि नक्सलवाद से निपटने के लिए राजनीतिक कदम उठाए जाने चाहिए और इन लोगों को विकास के लिए काम किया जाना चाहिए.”

महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर बनी समिति ने इस अध्ययन के साथ ही राज्य सरकार को कुछ सिफारिशें भेजी हैं.

इन सिफारिशों में कैम्पों में रह रहे लोगों को फिर से गाँव में बसाने और उन्हें रोज़गार उपलब्ध करवाने, आदिवासी इलाकों में जबर्दस्ती भूमि अधिग्रहण को रोकने और महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों के मामलों की निष्पक्ष जाँच होने जैसी सिफारिशें शामिल हैं.