सोमवार, 15 जनवरी, 2007 को 15:20 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, उत्तरप्रदेश
उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार ने अर्ध कुंभ के मद्देनज़र ऐसे लगभग 80 कारखानों पर रोक लगा दी है जिनका कचरा गंगा नदी को प्रदूषित करता है.
ऐसा इसलिए किया गया है ताकि इलाहाबाद में अर्ध कुंभ के अवसर पर इकट्ठा हुए श्रद्धालुओं को गंगा स्नान के लिए साफ़ पानी उपलब्ध कराया जा सके.
उत्तर प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव सीएस भट्ट ने बीबीसी को बताया कि इसके तहत कानपुर और उन्नाव ज़िले में स्थित क़रीब 70 चमड़ा कारखानों को बंद कर दिया गया है.
इन कारखानों के पास अपने यहाँ से निकलने वाले कचरे के शोधन के लिए ज़रूरी व्यवस्था नहीं है.
इसके अतिरिक्त 10 पेपर मिलों और शराब फ़ैक्ट्रियों को भी बंद करने का आदेश जारी किया गया है.
इन सभी इकाइयों को अर्ध कुंभ के ख़त्म होने तक बंद रखा जाएगा.
रोष व्याप्त
ग़ौरतलब है कि गंगा में पानी की कमी और पानी के प्रदूषित होने से अर्ध कुंभ में आ रहे श्रद्धालुओं में ख़ासा रोष व्याप्त था.
श्रद्धालुओं ने प्रदूषण के मुद्दे पर न्यायालय में जाने और गंगा में डूबकर आत्महत्या करने की भी चेतावनी दी थी.
प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी सीएस भट्ट ने कहा कि गंगा के पास वाले सभी कारखानों को सख़्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपना कचड़ा अपने परिसर में ही रोकें और जिनके पास कचड़ा रखने की सुविधा नहीं है वे कारखाने अपना उत्पादन बंद कर दें.
प्रशासन ने गंगा के पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए काफ़ी प्रयास किए हैं लेकिन श्रद्धालु अभी भी इन प्रयासों से संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं.
45 दिनों तक चलने वाले अर्धकुंभ के अवसर पर यहाँ लाखों श्रद्धालु इकट्ठा हो चुके हैं. तीन जनवरी से शुरू होने वाला अर्द्धकुंभ दुनिया के सबसे बड़े मेलों में से एक माना जाता है.
उम्मीद की जा रही है कि इस साल मेले में क़रीब सात करोड़ लोग आएंगे.