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नेपाल के माओवादी संसद में बैठेंगे

नेपाल में 10 साल सरकार से सशस्त्र संघर्ष के बाद माओवादी सोमवार को संसद में बैठेंगे. माओवादी नामित सांसद के रूप में शामिल होंगे.

यह इस साल होनेवाले आम चुनाव से पहले अंतरिम व्यवस्था है जिसके तहत माओवादी विद्रोहियों को राजनीतिक दायरे में लाया जा रहा है.

लगभग नौ महीने पहले माओवादियों पर प्रतिबंध था लेकिन अब वो सत्ता में भागीदारी करेंगे.

मौजूदा संसद की सोमवार को होनेवाली बैठक में नए अंतरिम संविधान को मंज़ूरी दी जाएगी. इसमें प्रधानमंत्री को प्रशासनिक शाक्तियाँ प्रदान की जाएँगीं.

दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र ने भी नेपाल में शांति प्रक्रिया में अपनी भूमिका को बढ़ा दिया है.संयुक्त राष्ट्र मंगलवार से माओवादियों के हथियार जमा करने के काम का निरीक्षण तेज करेगा.

शांति समझौता

ग़ौरतलब है कि कुछ समय पहले नेपाल में क़रीब दस साल से जारी विद्रोही हिंसा को समाप्त करने के इरादे से सरकार और माओवादी विद्रोहियों के बीच एक शांति समझौते पर दस्तख़त किए गए थे.

समझौते पर प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोईराला और विद्रोही माओवादी नेता प्रचंड ने सहमत हुए थे.

इस समझौते के बाद अब माओवादी विद्रोही अपने हथियार डालकर अंतरिम सरकार में भी शामिल हो रहे हैं.

माओवादियों के हथियारों को संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में रखा जाएगा.

पिछले क़रीब दस साल में नेपाल सरकार और माओवादी विद्रोही दोनों पर ही मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगे हैं और लड़ाई में 13 हज़ार से भी ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है.

अप्रैल, 2006 में राजशाही के विरोध और लोकतांत्रिक सरकार की बहाली की माँग के समर्थन में व्यापक प्रदर्शन हुए थे जिनके बाद राजा ज्ञानेंद्र को अपना सीधा शासन समाप्त करके संसद को बहाल करना पड़ा था.

उसके साथ ही एक बहुदलीय सरकार का भी गठन किया गया था और सरकार और माओवादी विद्रोहियों के बीच बातचीत का दौर भी शुरू हुआ था. तभी से दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम भी लागू है.