सोमवार, 15 जनवरी, 2007 को 01:36 GMT तक के समाचार
सुशील कुमार झा
बीबीसी संवाददाता, इलाहाबाद से
इलाहाबाद में चल रहे अर्ध कुंभ का पहला शाही स्नान सोमवार की दोपहर तक शांतिपूर्वक संपन्न हो गया.
मेला प्रशासन की ओर से बताया गया है कि पहले शाही स्नान के अवसर पर लगभग 70 लाख लोगों ने संगम में डुबकी लगाई.
केवल आह्वान अखाड़ा ने इस स्नान में हिस्सा नहीं लिया पर बाकी सभी अखाड़ों ने अपने लिए तय समय पर स्नान किया.
दरअसल आह्वान अखाड़ा अभी तक जूना अखाड़ा के साथ ही शाही स्नान में हिस्सा लेता रहा है पर इसबार उनकी ओर से अलग से स्नान की अनुमति माँगी गई जिसे अखाड़ा परिषद और मेला प्रशासन ने खारिज कर दिया.
बाद में उन्होंने जूना अखाड़ा के साथ अपना अलग बैनर लेकर चलने की अनुमति माँगी जिसपर इनकार किए जाने के बाद वे शाही स्नान में शामिल नहीं हुए.
पिछले महाकुंभ में अखाड़ों की बारी को लेकर काफी विवाद हुआ था और इसी को देखते हुए प्रशासन ने अखाड़ों से मशविरे के बाद सभी अखाड़ों का समय सुनिश्चित कर दिया है.
शाही स्नान
आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार सबसे पहले स्नान करनेवाला महानिर्वाणी अखाड़ा रहा जिसने सुबह छह बजकर पंद्रह मिनट पर स्नान किया.
इसके बाद निरंजनी अखाड़ा, जूना अखाड़ा, निर्मोही अखाड़ा, दिगंबर अखाड़ा, निर्वाणी अखाड़ा, उदासीन अखाड़ा, नया पंचायत अखाड़ा, बड़ा पंचायती अखाड़ा और सबसे अंत में निर्मला अखाड़ा के साधुओं ने संगम में स्नान किया.
इन अखाड़ों के स्नान के साथ ही पहला शाही स्नान पूरा हो गया. इन साधुओं के स्नान के साथ ही पास के घाटों पर श्रद्धालुओं ने भी स्नान किया.
लोगों के आने जाने और रहने की समुचित व्यवस्था की गई है लेकिन संगम के प्रदूषित पानी को लेकर कुछ महंतों में अभी भी रोष बना हुआ है.
हालांकि शाही स्नान से दो तीन पहले प्रशासन ने संगम में भारी मात्रा में स्वच्छ पानी छोड़ने की कोशिश की थी जिससे पानी साफ हो जाए.
इससे पानी का स्तर थोड़ा बढ़ गया है लेकिन यह कहना मुश्किल है कि बरसों की गंदगी दो दिनों के साफ़ पानी से पूरी तरह बह गई है.
आम जनता भी गंगा के इस प्रदूषण से नाराज़ और दुखी है लेकिन उनके बस में कुछ नहीं है.
आस्था के इस पर्व में इसी विश्वास से डुबकी लगा ले रहे हैं कि उनके भगवान उन्हें गंदे पानी से भी बचा लेंगे.