रविवार, 14 जनवरी, 2007 को 09:54 GMT तक के समाचार
भारत के राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने प्रधानमंत्री से सिफारिश की है कि अंग्रेज़ी भाषा को देशभर में पहली कक्षा से अनिवार्य विषय के तौर पर पढ़ाया जाए.
आयोग ने प्रधानमंत्री के सामने रखी गई अपनी पहली वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि प्रधानमंत्री इस विषय में राज्यों के मुख्यमंत्री से चर्चा करें.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस विषय पर मुख्यमंत्रियों के साथ राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक के दौरान चर्चा की जानी चाहिए ताकि क्षेत्रीय भाषा के साथ ही अंग्रेज़ी को भी पहली कक्षा से ही अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जा सके.
साथ ही इस बात पर भी बल दिया गया कि अंग्रेज़ी को अतिरिक्त विषय के तौर पर सामने रखने के बजाए इसे स्कूली पाठ्यक्रमों का हिस्सा बनाकर पेश किया जाए.
राष्ट्रीय ज्ञान आयोग के अध्यक्ष सैम पिट्रोडा के नेतृत्व में गठित एक उच्च स्तरीय दल ने कहा कि अगर ऐसी व्यवस्था लागू हो सकेगी तो 12 वर्षों के स्कूली अध्ययन के बाद विद्यार्थियों का अंग्रेज़ी भाषा में निपुण होना तय किया जा सकेगा.
ज़रूरी है अंग्रेज़ी
आयोग ने अपनी इस सिफ़ारिश के पीछे अंग्रेज़ी के बढ़ते महत्व की तो चर्चा की ही है साथ ही यह भी कहा है कि अंग्रेज़ी सीखने से विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का रास्ता आसान हो जाता है.
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, "स्कूली शिक्षा पूरी करने वाले ऐसे विद्यार्थी जिन्हें अंग्रेज़ी में उचित प्रशिक्षण नहीं मिल पाता है, वे उच्च शिक्षा के लिए अपने आप को कमज़ोर पाते हैं."
साथ ही आयोग ने इस बात पर भी बल दिया कि आज के दौर में रोज़गार के अवसरों में भी अंग्रेज़ी भाषा का ख़ासा महत्व है और इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि एक सदी से भी ज़्यादा समय से शिक्षा प्रणाली का हिस्सा होने के बावजूद अधिकतर युवा इस भाषा के आवश्यक ज्ञान से अछूते हैं.
आयोग की रिपोर्ट में बताया गया है कि नौ राज्यों और तीन केद्र शासित प्रदेश पहले से ही अंग्रेज़ी को पहली कक्षा से एक अनिवार्य विषय के तौर पर लागू कर चुके हैं. इसके अलावा 12 राज्य और तीन केंद्र शासित प्रदेश इस अलग-अलग स्तरों पर अनिवार्य घोषित कर चुके हैं.
इस स्थिति के आधार पर रिपोर्ट में कहा गया है कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर पाठ्यक्रम के अनिवार्य विषय के तौर पर लागू किया जाए.