शुक्रवार, 12 जनवरी, 2007 को 20:19 GMT तक के समाचार
भारत सरकार ने कहा है कि वह असम के अलगाववादी संगठन अल्फ़ा के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है बशर्ते वह हिंसा त्याग दे.
असम में पिछले कुछ दिनों में हिंसक गतिविधियों में 70 लोग मारे गए हैं और इनमें से अधिकतर हिंदी भाषी थे.
इसके बाद पिछले कुछ दिनों से भारतीय सेना ने उत्तरी असम में यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ़ असम (अल्फ़ा) के ख़िलाफ़ एक बड़ा सैन्य अभियान छेड़ रखा है.
शनिवार को दिल्ली में गृह सचिव विनोद कुमार दुग्गल ने असम में हिंसा के मुद्दे पर एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद कहा, "उन सभी का स्वागत है जो बातचीत करना चाहते हैं लेकिन उन्हें हिंसा त्याग देनी होगी."
साथ ही उनका ये भी कहना था कि यदि कोई संगठन हिंसा का रास्ता अपनाता है तो उसके ख़िलाफ़ कड़े और कारगर कदम उठाए जाएँगे.
दुग्गल का कहना था कि असम में काफ़ी हद तक स्थिति नियंत्रण में है और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 16 जनवरी को राज्य का दौरा करेंगे.
गृह सचिव का कहना था कि सरकार का प्रयास है कि सभी समुदायों के बीच विश्वास बहाल किया जाए.
उधर गुवाहाटी से पत्रकार सलमान रावी ने बीबीसी को बताया कि पहले भी भारत सरकार और अल्फ़ा के बीच बातचीत करवाने में कामयाब रहीं इंदिरा गोस्वामी फिर दोनो पक्षों के बीच बातचीत की इच्छुक हैं और इसके प्रयास कर रही हैं.