बुधवार, 10 जनवरी, 2007 को 04:03 GMT तक के समाचार
अमरीका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रारूप प्रस्ताव पेश किया है. इसमें बर्मा के सैनिक शासन से दमन का रास्ता छोड़ लोकतंत्र की राह पकड़ने को कहा गया है.
इस प्रस्ताव में बर्मा की लोकतंत्र समर्थक विपक्षी नेता आंग सान सू ची को रिहा करने का भी आह्वान किया गया है.
पिछले साल मई में सू ची की हिरासत बढ़ा दी गई थी. उन्हें पिछले कई वर्षों से नज़रबंद रखा गया है.
प्रस्ताव में स्वेच्छाचारी तरीक़े से फाँसी की सज़ा सुनाने का प्रावधान ख़त्म करने, महिलाओं और बच्चियों के साथ बलात्कार की घटनाओं पर लगाम कसने और अल्पसंख्यक कारेन समुदाय के लोगों पर हमले बंद करने का आह्वान किया गया है.
अमरीका लंबे अरसे से बर्मा में सैनिक शासन के तौर तरीक़ों पर सुरक्षा परिषद में चर्चा की माँग करता रहा है. उसका कहना है कि बर्मा में सैनिक शासन अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए ख़तरा है.
हालाँकि रूस और चीन ने इस अमरीकी पहल का विरोध किया है. दोनों देशों का कहना है कि यह मुद्दा सुरक्षा परिषद के विचार करने लायक नहीं है और स्थायी सदस्य होने के नाते वो प्रस्ताव को वीटो कर सकते हैं.
पिछले दिनों बर्मा की सरकार ने अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति से उसके सभी कार्यालयों को बंद करने का आदेश दिया था.
जिनेवा स्थित अपने मुख्यालय से जारी एक बयान में रेड क्रॉस ने कहा था कि उसे बर्मा सरकार के इस फ़ैसले पर खेद है क्योंकि इससे बर्मा में चल रहा संस्था का मानवीय कार्य रुक गया है.
इस बयान में कहा गया है कि इस आदेश से बर्मा के सबसे कमज़ोर लोगों के भले के लिए चलाया जा रहा अभियान अब अधर में पड़ गया है.