मंगलवार, 09 जनवरी, 2007 को 14:41 GMT तक के समाचार
भारत के असम राज्य में सुरक्षा बलों ने अल्फ़ा विद्रोहियों के ख़िलाफ़ एक बड़ा अभियान शुरू किया है जिसमें हज़ारों सैनिक भाग ले रहे हैं.
पिछले शुक्रवार से विद्रोहियों ने लगभग 70 लोगों को मार दिया है. इनमें से ज़्यादातर लोग ऐसे हिंदी भाषी लोग थे जो बिहार से कामकाज के लिए असम आए थे और वहाँ मजदूरी करते थे.
सैन्य अधिकारियों ने कहा है कि दो हज़ार अतिरिक्त सैनिकों को भी तैयार अवस्था में रखा गया है.
भारत के रक्षा मंत्री एके एंटोनी और सेना प्रमुख जनरल जेजे सिंह असम के दौरे पर हैं.
उधर असम में जारी हिंसा में गत रात को दो और हिंदी भाषी लोगों की मौत हो गई. अधिकारियों ने इस हिंसा के लिए यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ़ असम यानी अल्फा के विद्रोहियों को ज़िम्मेदार ठहराया है.
ग़ौरतलब है कि यह संगठन एक स्वतंत्र देश के गठन की माँग के समर्थन में संघर्ष कर रहा है.
संयुक्त अभियान
सैन्य अधिकारियों ने बताया है कि लगभग 13 हज़ार सैनिक और सुरक्षा बलों के जवाब इस अभियान में हिस्सा ले रहे हैं और इस अभियान के तहत अनेक जंगलों और पहाड़ी इलाक़ों में कार्रवाई की जा रही है जिनमें अरुणाचल प्रदेश से लगने वाला इलाक़ा भी शामिल है.
अधिकारियों के अनुसार सिबसागर ज़िले के मोरान इलाक़े में मंगलवार सुबह सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में दो विद्रोही मारे गए हैं.
समाचार एजेंसी एएफ़पी ने अरुणाचल प्रदेश के पुलिस प्रमुख आमोद कंठ के हवाले से ख़बर दी है, "असम और अरुणाचल प्रदेश के इस संयुक्त अभियान में सुरक्षा बल उन विद्रोहियों को निशाना बनाएंगे जिनके उन इलाक़ों में छिपे होने की संभावना है."
अधिकारियों ने कहा है कि अल्फ़ा विद्रोहियों के कुछ ठिकाने पड़ोसी अरुणाचल प्रदेश में भी हैं और उन ठिकानों का इस्तेमाल वे असम में हमले करने के बाद छुपने के लिए करते हैं और अन्य स्थानों पर जाने के लिए वे यहाँ जब-तब ठहरते भी हैं.
हज़ारों का पलायन
असम में इस हिंसा को लगभग एक दशक में सबसे भीषण हिंसा कहा जा रहा है और इसमें जो लोग अल्फा विद्रोहियों का निशाना बने उनमें से ज़्यादातर ईंट के भट्टों में काम करते थे.
इस हिंसा के बाद असम में रहने वाले हज़ारों हिंदी भाषी लोग बाहर भाग रहे हैं.
असम में रहने वाले हिंदी भाषी लोगों के शिविरों का केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल और रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने भी दौरा किया है. दोनों नेताओं ने लोगों को काफ़ी ढांढस दिलाने और विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने का भरोसा भी दिलाया.
लेकिन शायद हिंदी भाषी लोगों को मंत्रियों के भरोसे पर भरोसा नहीं है इसलिए वे असम छोड़कर भाग रहे हैं और रेलवे स्टेशन खचाखच भरे हुए हैं जहाँ हज़ारों लोग किसी रेलगाड़ी में जगह मिलने का इंतज़ार करते हुए नज़र आ रहे हैं.
असम के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अल्फा के विद्रोही 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौक़े पर अपनी हिंसा में तेज़ी कर सकते हैं. इसके अलावा फ़रवरी में असम में भारत के राष्ट्रीय खेलों का भी आयोजन किया जाना है.