सोमवार, 08 जनवरी, 2007 को 19:00 GMT तक के समाचार
बारबरा प्लेट
बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने पाकिस्तान सरकार से कहा है कि वह लापता लोगों के ढूंढने का काम में तेज़ी लाए.
अदालत में 41 लोगों के लापता होने के मामले की सुनवाई चल रही है जिनके रिश्तेदारों का आरोप है कि उन्हें गुप्तचर एजेंसियों ने पकड़ रखा है.
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ‘आतंकवाद के ख़िलाफ़ संघर्ष’ के नाम पर निर्दोष लोगों को पकड़ा गया है.
सरकारी वकील ने बताया कि लापता 41 में से 25 लोग वापस आ गए हैं और बाकी की वापसी के प्रयास किए जा रहे हैं.
हालांकि सरकारी अधिकारियों ने लापता लोगों के बारे में कोई भी जानकारी से इनकार किया है.
लेकिन सुप्रीम कोर्ट के दबाव के बाद कुछ लापता लोग सेना के शिविर में पाए गए थे जिन्हें बिना किसी आरोप के बंदी बना कर रखा गया था.
सरकार को चुनौती
लापता लोगों के परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रही आमना जांजुआ ने इस मामले में सरकार के दावे को चुनौती दी.
उनका कहना था कि केवल 18 लोग ही वापस आए हैं. उनका कहना था कि कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने अन्य लापता लोगों को हिरासत में देखा है.
उनका कहना था,'' हमारे पास चश्मदीद गवाह हैं, हमारे पास हाल में रिहा किए गए ऐसे लोग हैं जिन्होंने हिरासत में रखे लोगों को देखा है लेकिन उनका अता-पता नहीं है.''
अब 100 से अधिक परिवार अपने रिश्तेदारों का पता लगाने के लिए एकजुट हुए हैं.
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि 2001 में अमरीकी नेतृत्व के तहत जब से चरमपंथ के ख़िलाफ़ अभियान शुरू हुआ है तब से सैकड़ों लोगों को पकड़ा गया है.
इन लापता लोगों के कुछ रिश्तेदारों का कहना है कि कुछ लोग अल क़ायदा से कथित संबंधों के आधार पर पकड़े गए हैं.
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सितंबर में पाकिस्तान पर शक के आधार पर कथित चरमपंथियों को बिना किसी क़ानूनी प्रक्रिया के हिरासत में रखने का आरोप लगाया था.
एमनेस्टी का कहना था कि इसमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं. पाकिस्तान सरकार ऐसी ख़बरों का खंडन करती आई है.